प्रतीकात्मक तस्वीर
नागपुर. सरकारी अस्पतालों में नकली दवा सप्लाई कर मरीजों को देने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मामले का खुलासा होने से हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आया कि ये दवाएं नकली हैं। इस मामले में मुंबई से सप्लायर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। यह दवा कलमेश्वर ग्रामीण अस्पताल में मरीजों को दी जा रही थी।
सप्लायर के खिलाफ कलमेश्वर थाने में मामला दर्ज किया गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़ा गया आरोपी मीरा रोड, ठाने निवासी विजय शैलेन्द्र चौधरी बताया गया। आरोपी ने गिरफ्तारी पूर्व जमानत के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय, नागपुर बेंच की शरण लेने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस की तत्परता के चलते आरोपी को जमानत नहीं मिली।
6 फरवरी, 2023 को औषध निरीक्षक नितिन भांडारकर ने उक्त गोलियों के नकली होने की शिकायत मिलने पर कलमेश्वर अस्पताल का दौरा किया और इस दवा के नमूने परीक्षण के लिए मुंबई की चिकित्सा प्रयोगशाला में भेज दिए। तब खुलासा हुआ कि यह दवा नकली है। इसके बाद कार्रवाई की गई।
आरोपी ने उक्त दवा की सप्लाई के लिए सरकार की ई-निविदा में भाग लिया था। इस टेंडर के लिए आरोपी ने दवाओं की खरीद और आपूर्ति के मद्देनजर फर्जीवाड़ा दस्तावेज पेश किए थे। इसके बाद आरोपी विजय को सप्लाई की अनुमति मिल गई। इसके बाद शुभम ने दवा की आपूर्ति शुरू की। यह दवा रेसीपी-500, बैच नंबर एलसी-44, उत्पादन तिथि 10/2022, एक्सपायरी तिथि 09/2024 है। यह मेसर्स रेफंट फार्मा, प्राइवेट, केरल द्वारा मैन्यूफैक्चर किए जाने का खुलासा हुआ। इस दवा के नकली होने का संदेह होने के बाद पूरे स्कैम का खुलासा हुआ। इसके बाद मरीजों को यह दवा देना बंद कर दिया गया। इस मामले में सावनेर के उपविभागीय पुलिस अधिकारी अनिल म्हस्के की टीम के उपनिरीक्षक दत्तात्रय कोलटे, मनीष सोनोने, नितीश पुसाम ने कार्रवाई की।
ग्रामीण इलाकों में गरीब मरीजों को इस तरह की नकली दवा दिया जाना चौंकाने वाली बात है और यह सरकारी उदासीनता का कारण है। अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर भी दवाओं से परिचित नहीं हैं और उनके द्वारा मरीजों को ऐसी नकली दवाएं दिए जाना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। यह भी जानना जरूरी है कि कितने मरीजों को यह दवा दी गई और कब दी गई। इसके अलावा इन दवाओं के सेवन के बाद कलमेश्वर और आसपास के इलाकों में मरीजों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ रहा है, इसकी जांच भी जरूरी हो गई है।