Nagpur Municipal Corporation: महंगाई और बढ़ते खर्चों के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रही महानगर पालिका को बड़ी राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार के पास एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजा गया है। मनपा ने शहर को मिलने वाले जीएसटी के हिस्से में 17 प्रतिशत की भारी वृद्धि करने की मांग की है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो मनपा की मासिक आय में सीधे तौर पर 12 करोड़ रुपये की वृद्धि होगी जिससे शहर के रुके हुए विकास कार्यों को गति मिलेगी।
वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा मनपा को जीएसटी के हिस्से के रूप में हर महीने लगभग 160 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से कर्मचारियों के वेतन और स्थापना खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाता है। वैसे तो हर साल जीएसटी अनुदान में 8 प्रतिशत की वृद्धि होती है लेकिन मनपा द्वारा भेजे गए नए प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर 17% करने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर यह राशि बढ़कर 172 करोड़ रुपये प्रतिमाह हो जाएगी।
इससे मनपा को सालाना लगभग 144 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड मिल सकेगा। खर्च का लगातार बढ़ रहा है बोझ पिछले 3 वर्षों के दौरान ईंधन, बिजली, निर्माण सामग्री और ठेका मजदूरों की दरों में भारी वृद्धि हुई है लेकिन मनपा की आय में उस अनुपात में इजाफा नहीं हो सका है।
इसके अलावा शहर का तेजी से विस्तार हो रहा है और ‘नया नागपुर’ बसाया जा रहा है जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च काफी बढ़ गया है। मनपा का कहना है कि बढ़ा हुआ जीएसटी फंड सीधे तौर पर नागरिकों की सुविधाओं और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
राज्य की अन्य महानगर पालिकाओं की तर्ज पर मनपा ने भी यह विशेष प्रस्ताव तैयार किया है। अब इसे राज्य सरकार की सिफारिश के साथ सरकार के वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा। सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद अगली तिमाही से ही यह बढ़ा हुआ फंड मिलना शुरू हो सकता है। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मनपा के सभी राजनीतिक दलों के नगरसेवकों का भरपूर समर्थन मिला है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं ने एक सुर में कहा कि यदि नागपुर शहर का विकास करना है तो फंड बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। सभी ने इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द मंजूर करने की जोरदार मांग की।
सड़क और ड्रेनेज : मानसून के दौरान होने वाले गड्डों की मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए।
जलापूर्ति : शहर के नए विकसित इलाकों में पानी की पाइपलाइन बिछाने और 24×7 जल आपूर्ति योजना को लागू करने के लिए।
स्वास्थ्य सेवाएं: जोन स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करने और आवश्यक दवाओं की खरीद के लिए।
घनकचरा प्रबंधन: कचरा उठाने वाले नए वाहनों की खरीद और कचरा प्रसंस्करण परियोजनाओं (प्रोसेसिंग प्लांट्स) के लिए।