Nagpur News: नागपुर रेलवे स्टेशन के बाहर हर दिन ‘दिमाग का दही’, सवारी के लिए ऑटो चालक कर रहे छीना-झपटी
रेलवे सुरक्षा बल ने भले ही नागपुर स्टेशन पर बेलगाम हो चुकी चोरियों पर नकेल कस दी हो लेकिन बाहरी ऑटोरिक्शा चालकों की मनमानी पर रोक नहीं लग पा रही है। स्टेशन का पूर्वी भाग हो या पश्चिमी, प्रवेश द्वार पर इनका कब्जा रहता है।
- Written By: आंचल लोखंडे
सवारी के लिए ऑटो चालक कर रहे छीना-झपटी। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नागपुर: रेलवे सुरक्षा बल ने भले ही नागपुर स्टेशन पर बेलगाम हो चुकी चोरियों पर नकेल कस दी हो, लेकिन बाहरी ऑटोरिक्शा चालकों की मनमानी पर रोक नहीं लग पा रही है। स्टेशन का पूर्वी भाग हो या पश्चिमी, प्रवेश द्वार पर इनका कब्जा जमा रहता है। ये यात्रियों के ठीक सामने आकर उन्हें अपनी सवारी बनाने के लिए छीनाझपटी जैसा माहौल बना देते हैं। देखने में यह आम बात नजर आती है, लेकिन इससे रेल यात्रियों को भारी असहजता का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसा नहीं है कि ऑटो चालकों की इस मनमानी पर नियंत्रण की कोशिश नहीं की जा रही। रेलवे सुरक्षा बल का जवान पूरा दिन ही इन ऑटो चालकों को हद में रहने की हिदायत देता रहा है। लेकिन संगठित हो चुके इन बाहरी चालकों को वर्दी का भी डर नहीं रहा। आरपीएफ जवान सभी को हटाता रहता है और ऑटोरिक्शा चालक डोम तक पहुंचकर यात्रियों को अपनी सवारी बनाने के लिए झूम पड़ते हैं। वर्दी के साथ ही इन्हें इस बात का भी डर नहीं रहता कि यात्री महिला है, युवती या बच्चे, बुजुर्ग। ऑटो चालकों के ऐसे रवैये से यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है।
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जगह की कमी, अड़चनें बढ़ीं
ज्ञात हो कि इन दिनों स्टेशन के पुनर्विकास का कार्य तेजी से जारी है। पश्चिमी भाग में अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए मुख्य द्वार के ठीक सामने ही एक लेन छोड़कर ऊंची बैरिकेडिंग कर दी गई है। यहां मुश्किल से 6 फीट की जगह बची है, जबकि प्रवेश का प्रमुख रास्ता यही है। ऐसे में यात्रियों को स्टेशन से बाहर निकलता देख बाहरी ऑटोरिक्शा चालकों का हुजूम दौड़ पड़ता है।
रेल यात्री हो रहे परेशान
वहीं, पूर्वी तरफ में पहले ही जगह की कमी है। एक्सेलेटर के पास बैरिकेडिंग की गई है। इसी के पास लगेज स्कैनिंग मशीन और 10 मीटर पर टिकट काउंटर है। इस ओर से स्टेशन में प्रवेश और बाहर निकलने लगे दोनों एस्केलेटर और सीढ़ियां पूरा समय व्यस्त रहते हैं। एक ही जगह होने से पहले ही काफी भीड़ लगी होती है। ऐसे में सवारी पाने के लिए ऑटो चालकों की दादागीरी आम रेल यात्रियों के मन में अनहोनी का डर बना देती है।
