अयोध्या के लिए सीधी ट्रेन कब? नागपुर से जुड़े सभी तीर्थ, बस रामनगरी से दूरी क्यों?
Nagpur-Ayodhya Train: नागपुर और विदर्भ के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बने अयोध्या धाम पहुंचने के लिए अभी तक कोई सीधी ट्रेने नहीं है। इससे यात्रियों को लंबा सफर तट करना पड़ता है।
- Written By: प्रिया जैस
नागपुर से अयोध्या रूट (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur News: विदर्भ की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्थाओं को जोड़ने वाली सीधी ट्रेन सेवा अयोध्या तक अब भी अधूरी ख्वाहिश बनी हुई है। नागपुर से पुणे, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे महानगरों के लिए कई सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं जहां से कई ज्योतिर्लिंगों और तीर्थों तक पहुंचा जा सकता है। वहीं कई ट्रेनें कई तीर्थों से जुड़ी भी हैं लेकिन 500 वर्षों के बाद बने राम मंदिर यानी अयोध्या तक पहुंचने के लिए अब भी सीधी ट्रेन नहीं है।
नागपुर और विदर्भ के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बने अयोध्या धाम तक जाने के लिए आज भी यात्रियों को जटिल रूट, कई ट्रांसफर और लंबा समय झेलना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि नागपुर से अयोध्या तक सीधी ट्रेन चलाना पूरी तरह संभव है। नागपुर से गोंदिया, जबलपुर, प्रयागराज होते हुए अयोध्या तक का रूट पहले से ही कार्यशील है और इस मार्ग पर मौजूदा ट्रेनें भी संचालित हो रही हैं।
विदर्भ से जुड़ाव की जरूरत
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और भव्य उद्घाटन के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में बढ़ चुकी है। नागपुर और विदर्भ से भी बड़ी संख्या में लोग रामलला के दर्शन के लिए निकलते हैं लेकिन सीधी ट्रेन न होने के कारण अधिकांश यात्रियों को या तो झांसी, जबलपुर या वाराणसी होकर जाना पड़ता है।
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यह न सिर्फ समय लेने वाला है बल्कि यात्रियों के लिए असुविधाजनक भी है। स्थानीय संगठनों और जनप्रतिनिधियों की रेल मंत्रालय से हमेशा मांग रही है कि नागपुर से सीधी अयोध्या एक्सप्रेस चलाई जाए। इससे विदर्भ सीधे उत्तर भारत के धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्रों से जुड़ सकेगा।
नहीं मिलतीं कन्फर्म सीटें
विदर्भ से अयोध्या जाने वालों की लगातार संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में नागपुर से प्रतिदिन लगभग 3,000 से 4,000 यात्री उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जाते हैं। इनमें से बड़ी संख्या अयोध्या और वाराणसी की ओर होती है लेकिन इन यात्रियों को कन्फर्म सीट नहीं मिल पाती क्योंकि ट्रेनें कम और यात्री ज्यादा। यात्रियों का कहना है कि जब कम भीड़ वाले रूट पर भी विशेष ट्रेनें चलाई जाती हैं तो फिर अयोध्या जैसे हाई डिमांड रूट पर सीधी ट्रेन न होना समझ से परे है।
एक तीर कई निशानें
- धार्मिक लाभ – अयोध्या सीधी ट्रेन से नागपुर और विदर्भ के लाखों श्रद्धालु आसानी से रामलला के दर्शन कर पाएंगे।
- व्यावसायिक लाभ – प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर जैसे बड़े शहरों से विदर्भ का सीधा संपर्क होगा जिससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- पर्यटन में वृद्धि – अयोध्या के अलावा प्रयागराज और काशी जाने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी।
- समय की बचत – सीधी ट्रेन से लगभग दो घंटे की बचत होगी और यात्रियों को ट्रेन बदलने की दिक्कत नहीं झेलनी पड़ेगी।
रेलवे की संवेदनहीनता समझ से परे
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुणे, मुंबई या चेन्नई जैसी जगहों तक तो रेल सुविधाएं बार-बार बढ़ाई जाती हैं लेकिन अयोध्या जैसी आस्था की भूमि के लिए सरकार और रेलवे संवेदनशील क्यों नहीं दिखते? रेलवे प्रशासन से अब यह अपेक्षा की जा रही है कि वह यात्रियों की सुविधा और मांग को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द नागपुर-अयोध्या सीधी ट्रेन का ऐलान करे। अब वक्त आ गया है कि विदर्भ की जनता के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए अयोध्या तक सीधी ट्रेन की सौगात दी जाए।
किस रूट से कितनी दूरी
इटारसी रूट
नागपुर – इटारसी : 298 किमी
इटारसी – जबलपुर : 244 किमी
जबलपुर – प्रयागराज : 359 किमी
प्रयागराज – अयोध्या धाम : 161 किमी
कुल दूरी : 1062 किमी
कुल समय : अनुमानित 20 घंट
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गोंदिया रूट
नागपुर – गोंदिया
गोंदिया – जबलपुर
जबलपुर – प्रयागराज
प्रयागराज – अयोध्या धाम
कुल दूरी : 1012 किमी
कुल समय : अनुमानित 18.30 घंटे
