नागपुर मनपा का बजट अटका: संशोधन और छपाई के पेंच में फंसा 6,200 करोड़ का बजट; 1 अगस्त से लागू होने की उम्मीद

Nagpur Municipal Budget: नागपुर मनपा का 6,200 करोड़ रुपए का बजट संशोधनों के कारण अब तक लागू नहीं हो सका है। बजट के 1 अगस्त से लागू होने की संभावना है, जिससे विकास निधि और कार्य प्रभावित हैं।
Nagpur Municipal Corporation budget stalled: ₹6,200 crore budget held up by revision and printing issues; expected to come into effect from August 1.
नागपुर मनपा बजट 2026,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Nagpur NMC Budget 2026 Delayed: नागपुर मनपा के स्थायी समिति द्वारा पेश किए गए आम बजट को भले ही एक माह का समय होता आ रहा हो लेकिन अब तक इसके लागू होने का इंतजार किया जा रहा है। आलम यह है कि बजट चर्चा के दौरान दिए गए सुझावों के अनुसार अब तक संशोधन नहीं होने के कारण बजट लागू होने में देरी हो रही है। यहां तक कि संशोधन के बाद बजट अब 1 अगस्त से ही लागू होने की संभावना सूत्रों ने जताई।

उल्लेखनीय है कि मनपा आयुक्त ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 5,800 करोड़ का बजट पेश किया था, जबकि स्थायी समिति ने 6,200 करोड़ का बजट पेश किया। बजट पेश किए जाने के बाद इस पर चर्चा के दौरान कई सुझाव दिए गए।

यहां तक कि कुछ वित्तीय आवंटन भी नए सिरे से किए जाने हैं। यही कारण है कि अब पूरे बजट में से कौनसे खाते में संशोधन किया जाए, इसे लेकर स्थायी समिति में मंथन करने में देरी हुई।

बताया जाता है कि फिलहाल बजट में किए गए संशोधन के बाद इसे पुनः छपाई के लिए भेजा गया है जिसके बाद ही प्रशासकीय मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, यही कारण है कि फिलहाल पार्षदों को विकास निधि के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर में करना होगा सुधार

जानकारों की मानें तो स्थायी समिति की ओर से संशोधित बजट पेश करने के बाद किस खाते में कितनी निधि रखी गयी उसके अनुसार लेखा-जोखा रखने के लिए बनाए गए सॉफ्टवेयर के माध्यम से निधि प्रस्तावित की जाएगी।

प्रशासन की मानें तो अलग-अलग तरह के विकास के लिए खाते तैयार किए गए हैं। इन खातों में निधि रखने के बाद ही विकास कार्यों के लिए निधि का आवंटन होता है। यही कारण है कि सर्वप्रथम स्थायी समिति द्वारा संशोधित बजट आना जरूरी है।

इन खातों के आधार पर ही विभाग प्रमुखों की ओर से विकास कार्यों की फाइलों को मंजूरी भी दी जाती है। बहरहाल अब तक बजट मंजूर नहीं होने के कारण पूरा कामकाज ठप पड़ा है।

कई विकास कार्यों पर अभी से कैंची

प्रशासन की मानें तो बजट पर चर्चा के दौरान कई कार्यों के लिए निधि का नए सिरे से आवंटन करने की मांग की गई। यहां तक कि महापौर, उपमहापौर, सत्ता पक्ष नेता और विपक्ष नेता के लिए भी निधि का आवंटन किया गया जिससे 6,200 करोड़ के बजट में ही इस निधि का समावेशक आंकड़ा तैयार किया गया है। सूत्रों के अनुसार इतनी ही राशि अन्य विकास कार्यों से घटाई जाएगी। यही कारण है कि बजट पर अमल करने से पहले ही कई विकास कार्यों पर कैंची लगने की जानकारी भी सूत्रों ने दी।

इस तरह बढ़ा है आंकड़ा

  • पार्षदों का वार्ड फंड' 25 लाख से बढ़ाकर 35 लाख रुपये।
  • महापौर निधि को 20 करोड़ रुपये किया गया।
  • उपमहापौर के लिए 20 करोड़ का हुआ प्रावधान।
  • वर्धमाननगर में छत्रपति शिवाजी महाराज के पुतले के लिए 50 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये के बजट का हुआ प्रावधान।

आयुक्त के आंकड़ों तक ही नहीं पहुंचता प्रशासन

स्थायी समिति की ओर से भले ही 6,200 करोड़ का बजट पेश किया गया हो लेकिन इस आंकड़े तक पहुंचना लगभग नामुमकिन होने की संभावना प्रशासन के उच्च अधिकारियों ने जताई है।

इन अधिकारियों का मानना है कि आयुक्त द्वारा दिए गए बजट के आंकड़ों तक पहुंचने के लिए ही अधिकारियों और कर्मचारियों को एड़ी-चोटी का जोर लगाना होता है।

इसके बावजूद बजट के सभी आंकड़े छूना अब तक संभव नहीं हो पाया है। यही कारण रहा है कि अधिकांशतः हर वर्ष नागपुर मनपा आयुक्त द्वारा पेश होने वाले संशोधित बजट में आंकड़ा घटाया जाता है। इसमें भी स्थायी समिति की ओर से 400 करोड़ अधिक का बजट दिया है।

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