BRICS सम्मेलन से पहले नागपुर में ‘ब्यूटीफिकेशन’ की दौड़, मेट्रो पिलरों की बारिश में धुलाई
Nagpur, BRICS Summit: BRICS सम्मेलन से पहले नागपुर में शहर को चमकाने का अभियान तेज है। मेट्रो पिलरों की सफाई, सड़कों की मरम्मत और प्रतिमाओं के सौंदर्यीकरण को लेकर प्रशासन की तैयारियां चर्चा में हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, ब्रिक्स सम्मेलन, मेट्रो पिलर, शहर सौंदर्यीकरण,(फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)
Nagpur BRICS Summit Metro Pillars: नागपुर सिटी में एक अजीब सा महौल देखने को मिल रहा है। कहीं पर मेट्रो पिलर से गिरने वाले फव्वारे को रोकने के लिए फायर टेंडर का सहयोग लिया जा रहा है तो कहीं मेट्रो पिलर पर ‘कालिख’ को बरसात के दिनों में साफ करने के लिए संप्रिंकलर का उपयोग हो रहा है। दरार पड़ चुकी सीमेंट सड़क को डामर बिछाकर छिपाने का प्रयास हो रहा है।
इस प्रकार के अजीब वाकयों से शहरवासी भी अचंभित हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इस तरह से प्रशासन व्यवहार क्यों कर रहा है। हालांकि जानकारी रखने वालों ने बताया कि यह सब ‘ब्रिक्स सम्मेलन’ के लिए किया जा रहा है।
प्रशासन शहर को साफ-सुंदर दिखाने के लिए इस प्रकार का प्रयोग दोगुनी रफ्तार से कर रहा है। ‘विदेशी’ मेहमानों के सामने उनकी नाक न कटे, इसलिए इस प्रकार की पहल की गई है। लोगों ने बताया कि इसके लिए लगभग 30 करोड़ रुपये का फंड प्राप्त हुआ है।
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अब इस फंड का ‘सदुपयोग’ तो होना चाहिए, इसलिए बरसात के दिनों में भी पिलरों से ‘कालिख’ हटाने का ‘असफल’ प्रयास हो रहा है। मेट्रो के नीचे धूल फांक रहीं प्रतिमाओं को धोया जा रहा है, साफ किया जा रहा है और लाइटिंग की जा रही है। इससे शहर का ‘इंप्रेशन’ विदेशी मेहमानों के समाने अच्छा पड़ेगा।
सीमेंट सड़कों पर डामरीकरण
शहर की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक अधिकांश मार्गों को सीमेंट कंक्रीट (सीसी) में बदल दिया गया। आखिर ऐसा क्यों किया गया, इसका जवाब जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और नीति-निर्माता ही बेहतर दे सकते हैं।
यह भी दावा किया गया था कि सीमेंट रोड बनने से मनपा को बचत होगी, बार-बार सड़क बनाने की झंझट से बचा जा सकेगा लेकिन यहां पर अजब-गजब चाल देखने को मिल रहा है। एयरपोर्ट से खापरी की ओर जाने वाले दोनों साइड के मार्ग (सीमेंट रोड) बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए है। दरारें इतनी चौड़ी हो गई हैं कि फोरव्हीलर के ड्राइवर को परेशानी हो जाती है।
टूव्हीलर का चक्कर इन दरारों में फंस सकता है। इस नाकामी को छिपाने के लिए सीमेंट रोड के ऊपर डामर रोड का परत डाला जा रहा है। इससे अधिकारियों और ठेकेदारों की गठजोड़ को ‘छिपाने’ का काम ही किया जा रहा है। भ्रष्टाचार की जांच कराये जाने के बजाय छिपाने के काम को लोग देख रहे हैं। सवाल भी कर रहे हैं लेकिन नेताओं के कानों में जू तक नहीं रेंग रही है।
रात 12 बजे फव्वारा बंद करने का कार्य
- जयप्रकाश नगर पर रात 12 बजे फायर टेंडर देख लोगों को लगा आग लगी होगी। लोग सतर्क हुए।
- पूछताछ की पता चला, फायर वाले पिलर से गिर रहे फव्वारे के रूप में गिर रहे पानी को रोकने का प्रयास कर रहे थे।
- बताया गया कि समीप के होटल में बड़ा इवेंट होने वाला है। परिवहन से संबंधित है।
- इसके लिए 11 देशों के प्रतिनिधि आ रहे हैं। उनकी नजर इस पर नहीं जानी चाहिए, इसलिए फव्वारों को रोकना जरूरी था।
- इसके लिए फायर टेंडर का सहारा लिया गया। टेंडर वाले भी सीढ़ी से चढ़कर पिलर के ऊपर से पानी निकालने लगे।
- पानी निकालने के बाद बचे हुए एरिया को साफ करते हुए देखे गए, ताकि कोई कोर कसर न रहे।
विदेशी मेहमानों से पहले बारिश में धुलने लगे मेट्रो पिलर
इसी मार्ग पर एयरपोर्ट से लेकर छत्रपति चौक तक भरी बारिश में कर्मचारी पिलरों की धुलाई करते हुए देखे गए। सभी आश्चर्य में थे कि बारिश के दौर में आखिर पिलर को पानी से क्यों धोया जा रहा है। हर आने जाने वाले इस कार्य को बड़े ही कौतुहल के साथ देख रहे थे।
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सामान्य लोगों की समझ से ये बातें ऊपर से निकल रही थीं और कुछ लोग चर्चा भी करते रहे कि आखिर ये हो क्या रहा है। अचानक नीचे काले-पीले पड़े को रंगना तो समझ में आ रहा था लेकिन ‘कालिख लिये पिलर को बरसात के शुरुआती दौर में धोने का औचित्य क्या था, यह आम लोग समझ नहीं पाए। वे यह समझ नहीं पाए कि गुरुवार से आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए यह सब हो रहा है, उनके लिए नहीं।
