VVPAT के बिना चुनाव पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, नागपुर खंडपीठ ने महाराष्ट्र चुनाव आयोग को दिया नोटिस

Bombay High Court की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र SEC से बिना वीवीपैट स्थानीय निकाय चुनाव कराने के फैसले पर जवाब मांगा। कांग्रेस नेता प्रफुल्ल गुडधे की याचिका में पारदर्शी मतदान की मांग की गई।
Bombay High Court Notice Maharashtra State Election Commission
कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Bombay High Court Notice SEC: कांग्रेस नेता प्रफुल्ल गुडधे ने आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में वीवीपैट (VVPAT) का उपयोग न करने के महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के निर्णय को बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में चुनौती दी है। गुडधे ने अधिवक्ता पवन दहत और निहाल सिंह राठौड़ के माध्यम से यह याचिका दायर की है।

स्थानीर्य निकाय चुनाव में वीवीपैट का इस्तेमाल नहीं करने के उसके फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर नागपुर पीठ ने शुक्रवार को महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को स्था नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति अनिल किलोर की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्वाचन आयोग से अगले सप्ताह तक याचिका पर जवाब मांगा है।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

याचिका में तर्क दिया गया है कि पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए ‘वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल मशीन' (वीवीपैट) का उपयोग अनिवार्य है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि अगर एसईसी वीवीपैट का इस्तेमाल नहीं करने जा रहा है, तो चुनाव मतपत्रों (Ballot Papers) से कराए जाने चाहिए।

उन्होंने अदालत से यह अनुरोध भी किया है कि वह राज्य निर्वाचन आयोग को किसी भी चुनाव में वीवीपीएटी के बिना ईवीएम का उपयोग करने से रोके।

इसके अलावा, याचिका में उच्च न्यायालय से एसईसी को आगामी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतपत्रों के माध्यम से चुनाव कराने का निर्देश देने या वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल नहीं करने के आयोग के फैसले को रद्द करने का आग्रह किया गया है।

वीवीपैट की आवश्यकता पर तर्क

याचिका में वीवीपैट की आवश्यकता को कई तर्कों के आधार पर रेखांकित किया गया है:

  • मतदान का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।
  • प्रत्येक नागरिक को यह जानने का अधिकार है कि उसका वोट सही तरीके से पड़ा है या नहीं।
  • वीवीपैट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ी एक स्वतंत्र प्रणाली है, जो मतदाताओं को यह सत्यापित करने की अनुमति देती है कि उनका वोट उनके इरादे के अनुसार डाला गया है।
  • याचिका में कहा गया है कि वीवीपैट के इस्तेमाल के बिना, वोट दर्ज करने वाली ईवीएम सत्यापन योग्य नहीं रह जाती हैं। ऐसा कोई अन्य तरीका नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि वोट सही तरीके से दर्ज किया गया है या नहीं।

याचिका में वर्ष 2013 के सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए वीवीपैट एक अनिवार्य आवश्यकता है।

गुडधे ने क्या आरोप लगाए?

गुडधे ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग चुनावों में निष्पक्षता की कीमत पर एक अपारदर्शी और अविश्वसनीय प्रणाली का इस्तेमाल करने पर 'अड़ा हुआ' है।

याचिका में यह भी बताया गया है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि चुनाव ईवीएम के जरिए ही कराए जाएं। यदि निर्वाचन आयोग वीवीपैट मशीनों की कमी का सामना कर रहा है, तो चुनाव मतपत्रों के जरिए भी कराया जा सकता है।

महाराष्ट्र राज्य में विभिन्न स्थानीय निकायों के चुनाव जनवरी 2026 तक होने हैं। इसलिए, बंबई उच्च न्यायालय द्वारा एसईसी से मांगे गए जवाब और आगामी सप्ताह में इस मामले पर लिए जाने वाले फैसले का इन चुनावों की प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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