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नागपुर के बस स्टॉप पर हाई कोर्ट सख्त, बदहाली पर लिया संज्ञान; अनुच्छेद 21 का हवाला

Nagpur Bus Stops: नागपुर में बस स्टॉप की बदहाल स्थिति पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने इसे अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन माना है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: May 20, 2026 | 04:12 PM

नागपुर बस स्टॉप,(सोर्स: सोशल मीडिया)

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Nagpur Bus Stops High Court PIL: नागपुर शहर में बस स्टॉप के बुनियादी ढांचे की कमी, अतिक्रमण और यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर हाई कोर्ट की ओर से कड़ा रुख अपनाया गया, बस स्टॉप की बदहाली को लेकर समाचार पत्र में छपी खबर पर हाई कोर्ट की ओर से स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित के रुप्प में स्वीकार किया। कोर्ट ने इसे सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का हनन माना है।

प्रशासन की लापरवाही से यात्री बेहाल

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि छात्र, वरिष्ठ नागरिक, दिहाड़ी मजदूर और दफ्तर जाने वाले हजारों नागरिक हर दिन सिटी बस सेवा पर निर्भर हैं लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और उचित योजना के अभाव में इन यात्रियों को भारी असुविधा और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने विशेष रूप से चिंता जताते हुए कहा कि विदर्भमें अप्रैल और मई के महीने में चलने वाली भीषण लू (हीटवेव) के दौरान बस स्टॉप पर शेल्टर का होना यात्रियों के लिए अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

प्रमुख चौराहों और बस ठहराव का बुरा हाल

अदालत ने शहर के सबसे व्यस्त मागों की स्थिति पर गंभीरता जताते हुए बताया कि मेडिकल चौक से क्रीड़ा चौक और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज प्रतिमा से बेसा रोड तक के मार्ग पर कोई भी निधर्धारित बस स्टैंड या उचित बस स्टॉप की सुविधा नहीं है। मेडिकल चौक के पास सिटी बसें एक पेट्रोल पंप के करीब रुकती हैं लेकिन भारी भीड़ के बावजूद वहां मनपा द्वारा बस शेल्टर, बैठने की व्यवस्था या साइनबोर्ड जैसी कोई भी बुनियादी सुविधा नहीं दी गई है।

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यात्रियों को मजबूरन हर मौसम में सड़क किनारे खड़ा रहना पड़ता है। इसी तरह से सीताबर्डी से बेसा चौक मार्ग पर स्थित स्वामी समर्थ मानेवाड़ा रोड बेसा बस स्टॉप सड़क के एकदम किनारे पर बना है जहां यात्रियों का पहुंचना मुश्किल है। इस बदइंतजामी का फायदा उठाकर वहां विभिन्न विक्रेताओं और वाहन मालिकों ने अतिक्रमण कर लिया है और इस जगह का इस्तेमाल बस स्टॉप के अलावा अन्य कार्यों के लिए हो रहा है।

आयुक्त को 4 महीने में रिपोर्ट सौंपने का आदेश

जनता की इस भारी समस्या को देखते हुए हाई कोर्ट ने नागपुर महानगरपालिका के आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे इस मामले की तत्काल जांच करें और बस स्टॉप के बुनियादी ढांचे व यात्री सुविधाओं को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठणं। अदालत ने मनपा आयुक्त को इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 4 महीने के भीतर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार । न्यायिक) को सौंपने का सखा आदेश भी दिया।

मनपा की अतिक्रमण उन्मूलन कार्रवाई पर सवाल

अवलत ने कहा कि हालांकि मनपा का अतिक्रमण उन्मूलन दस्ता और सिटी ट्रैफिक पुलिस शहर के कुछ हिस्सी में अभियान बलाते है लेकिन इस स्थान पर अतिक्रमण को रोकने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया गया है। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि संवैधानिक विफलता है। अदालत ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अहमदाबाद नगर निगम बनाम नवाब खान’ मामले का विस्तार से हवाला दिया जिसमें आश्रय के अधिकार को जीवन के अधिकार (अनुछेद 21) का अनिवार्य हिस्सा माना गया है।

यह भी पढ़ें:- नागपुर यूनिवर्सिटी पर भाजयुमो का मोर्चा, विद्यार्थियों की समस्याओं पर भाजयुमो आक्रामक; 48 घंटे का अल्टीमेटम

हाई कोर्ट ने अपनी कड़ी टिप्पणी में कहा, ‘बस स्टॉप पर बुनियादी ढांचे का अभाव महज एक प्रशासनिक चूक नहीं है बल्कि यह संवैधानिक शासन की विफलता को दर्शाता है। जब नागरिकों को बिना आश्रय या बैठने की जगह के अत्यधिक खराब मौसम में इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है तो राज्य उन्हें अनुछेद 21 के तहत गारंटीकृत गरिमापूर्ण जीवन से वंचित करता है।” अदालत ने स्पष्ट किया कि मनपा अपनी इस वैधानिक जिम्मेदारी से बद नहीं सकती।

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Published On: May 20, 2026 | 04:12 PM

Topics:  

  • Bomaby High Court
  • Maharashtra News
  • Nagpur News
  • Public Transport

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