बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ का फैसला: विदर्भ में 15 जून से स्कूल शुरू करने का आदेश रद्द, सरकार को झटका
Nagpur Bench Cancels Vidarbha Schools: बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने 15 जून से स्कूल शुरू करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। भीषण गर्मी को देखते हुए यह बड़ा फैसला दिया गया।
- Written By: अंकिता पटेल
विदर्भ स्कूल, हाईकोर्ट फैसला, नागपुर खंडपीठ,(सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Bombay High Court: नागपुर तपती धूप में 15 जून से विदर्भ के स्कूल शुरू करने के राज्य सरकार के निर्णय को आखिरकार बॉम्बे उत्त्व न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने रद्द कर दिया है। इसके साथ ही जब अदालत में सुनवाई चल रही थी तब शिक्षा निदेशक द्वारा विदर्भ के स्कूलों को 22 जून से शुरू करने के संबंध में जानबूझकर जारी किया गया पत्र भी अदालत ने रद्द कर दिया और राज्य सरकार को तगड़ा झटका दिया है।
विदर्भमें गर्मी की भीषणता को देखते हुए पहले विदर्भ के स्कूल 1 जुलाई या उसके आसपास की तारीख से शुरू किए जाते थे। इससे पहले 8 जून 2007 को उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने ऐसा ही एक निर्णय भी दिया था। उस फैसले के आलोक में राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए शासनादेश प्रभावी थे लेकिन इसके बावजूद शिक्षा निदेशालय, पुणे द्वारा 28 मार्च को एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी कर विदर्भ के स्कूलों को 15 जून से शुरू करने का निर्देश दिया गया।
जून महीने में विदर्भ का तापमान, उसका छात्रों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाला असर और इस संबंध में 8 जून 2007 के उच्च्च न्यायालय के पुराने आदेश को आधार बनाकर ‘महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति’ की ओर से प्रदेश अध्यक्ष विजय कोंबे और नागपुर जिला अध्यक्ष लीलाधर ठाकरे के माध्यम से उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में एक याचिका दायर की गई थी।
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न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की अदालत में बुधवार को इस पर सुनवाई हुई, अपना फैसला सुनाते हुए अदालत ने शिक्षा निदेशालय के 28 मार्च 2026 के परिपत्र को रद्द कर दिया और साथ ही 9 जून के पत्र को भी खारिज कर दिया। अदालत ने 20 अप्रैल 2023 के शासनादेश के अनुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं अर्थात इस शासनादेश के प्रावधानों के अनुसार अब सरकार को विदर्भ के स्कूल 30 जून से शुरू करने होंगे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट भानुदास कुलकर्णी और सरकार की ओर से सरकारी वकील दीपक ठाकरे ने पैरवी की। न्यायालय के इस निर्णय का महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति, विभिन्न शिक्षक संगठनों और शिक्षक वर्ग द्वारा स्वागत किया जा रहा है।
छात्रों के दृष्टिकोण से लाभदायक निर्णय
विदर्भ में जून महीने के तापमान को ध्यान में रखते हुए न्यायालय का आज का निर्णय छात्रों के लिए अत्यंत लाभदायक साबित होगा। छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के न्याय सिद्धांत की रक्षा करने वाले इस निर्णय का हम स्वागत करते हैं। हमें बेहद खुशी है कि हम छात्रों के हित के लिए एक सफल लड़ाई लड़ सके।
-महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति, याचिकाकर्ता तथा जिला अध्यक्ष, लीलाधर रा. ठाकरे
न्यायालय ने व्यक्त की तीव्र नाराजगी
न्यायालय के 8 जून 2007 के पुराने फैसले, विदर्भ के अत्यधिक तापमान और छात्रों के स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मुद्दों की अनदेखी करने पर अदालत ने सरकार के रवैये के प्रति तीव्र नाराजगी व्यक्त की।
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अदालत ने कहा कि जब मूल शासनादेश लागू था तो शिक्षा निदेशक द्वारा इस संबंध में अलग से पत्र जारी करना बिल्कुल भी उचित नहीं था। अदालत ने कल जारी किए गए पत्र पर भी कड़ी फटकार लगाई, साथ ही न्यायालय ने यह भी सुनाया कि भविष्य में विदर्भ के स्कूल शुरू करने के फैसले में बार-बार बदलाव न किया जाए।
