नागपुर हेल्थ अपडेट: गठिया के लक्षणों को न करें नजरअंदाज, समय पर इलाज न होने से दैनिक जीवन पर पड़ रहा गंभीर असर
Nagpur Arthritis Cases: गठिया अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने मानसून और सर्दियों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर डॉक्टर स्वास्थ्य जागरूकता,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Nagpur Monsoon Health Joint Pain: नागपुर हाल के वर्षों में गठिया (आर्थराइटिस) समाज के सभी आयु वर्गों को प्रभावित करने वाली एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन गई है। पहले इसे मुख्य रूप से बुजुर्गों से जुड़ी बीमारी माना जाता था लेकिन आज युवाओं में भी इसके बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। डॉ. अनघाश्री एस. ने इसे लेकर सतर्कता बरतने का आह्वान करते हुए कहा कि मानसून और सर्दियों के मौसम में गठिया के लक्षण अक्सर अधिक गंभीर हो जाते हैं।
तापमान कम होने पर जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां और लिगामेंट्स सख्त हो जाते हैं। इससे रक्त संचार प्रभावित होता है जिसके कारण दर्द और जकड़न बढ़ जाती है। कई मरीजों को सुबह उठने के बाद जोड़ों को हिलाने-डुलाने में विशेष कठिनाई महसूस होती है।
इसके अलावा ठंड के मौसम में शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं, धूप की कमी से शरीर में विटामिन-डी का स्तर घटता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो सकती है जिससे गठिया के लक्षण और बढ़ जाते हैं। गठिया का अर्थ है जोड़ों में सूजन होना। इसके कारण दर्द, सूजन, अकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई होती है। यदि समय रहते उपचार न किया जाए तो यह व्यक्ति के दैनिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
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गठिया के विभिन्न प्रकारों में समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी
डॉ. अनघाश्री एस. ने बताया कि ऑस्टियो आर्थराइटिस गठिया का सबसे सामान्य प्रकार है। इसमें जोड़ों की उपास्थि (कार्टिलेज) धीरे-धीरे घिसने लगती है। परिणामस्वरूप घुटनों, कूल्हों, कंधों और रीढ़ में दर्द, अकड़न तथा चलने-फिरने में परेशानी होती है। अधिक वजन और जोड़ों पर बढ़ता दबाव इसके प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय पर उपचार से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि रह्युमेटोइड आर्थराइटिस एक दीर्घकालिक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं के स्वस्थ ऊतकों पर हमला करने लगती है। इससे जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न होती है।
गठिया रोग में समय पर उपचार और जीवनशैली में सुधार जरूरी
यह बीमारी आमतौर पर शरीर के दोनों तरफ के जोड़ों जैसे हाथ, कलाई, पैर और घुटनों को प्रभावित करती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह विकलांगता का कारण भी बन सकती है। उन्होंने बताया कि इसमें गाउटी आर्थराइटिस गठिया एक अत्यंत दर्दनाक स्थिति है जो जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा होने के कारण होती है।
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जब शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है या उसका निष्कासन कम हो जाता है तो सुई के आकार के क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने लगते हैं। गाउटी आर्थराइटिस को नियंत्रित करने के लिए प्यूरीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, शराब से बचना और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाइयां लेना आवश्यक है।
