हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Amravati Judges Colony Robbery: अमरावती के कांतानगर इलाके में 5 न्यायाधीशों और 4 अदालत कर्मचारियों के आवासों में हुई चोरी की चौंकाने वाली घटना पर मंगलवार को न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस मामले को न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा मानते हुए इस पर स्वतः संज्ञान लिया।
जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर इसे याचिका के रूप में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने तथा अदालत की मदद के लिए अधिवक्ता वेद देशपांडे की अदालत मित्र के रूप में नियुक्ति की। खबर के अनुसार, अज्ञात चोरों ने अमरावती जिले के कांतानगर इलाके को निशाना बनाया था।
चोरों ने विशेष रूप से शाहपुर, नल-दमयंती और पैनगंगा नामक इमारतों में सेंध लगाई जहां अधिकांश न्यायाधीश निवास करते हैं। इसके अलावा अदालत के कर्मचारियों के निवास सुवर्ण रेखा और शरयू इमारतों में भी चोरी की वारदात को अंजाम दिया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव और अन्य को प्रतिवादी के रूप में नोटिस भी जारी किया। हाई कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वे संबंधित समाचार लेख के सभी कागजात अदालत मित्र को सौंप दें, ताकि वे जल्द से जल्द याचिका दाखिल कर सकें। यह घटना राज्य में न्यायिक प्रणाली से जुड़े अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है जिस पर न्यायालय ने तुरंत और सख्त रुख अपनाया है।
समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार चोरों ने घरों के दरवाजों को जबरन खोला और ताले तोड़कर सोना तथा नकदी चुरा ली। चोरी गए कुल सामान की सटीक कीमत का फिलहाल पता नहीं चल सका है क्योंकि घटना के समय अधिकांश निवासी अपने घरों में मौजूद नहीं थे। इस घटना के समय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अतहर अली एजाज अली बेग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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आरोपियों की पहचान के लिए अधिकारी इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज में 25 से 35 वर्ष की अनुमानित आयु के 3 लोगों को चोरी करते हुए देखा गया है। पुलिस ने मौके पर इन चोरों को पकड़ने का प्रयास भी किया था लेकिन चोर कंपाउंड की दीवार फांदकर पास के जंगल में भागने में सफल रहे। फिलहाल अधिकारियों ने संदिग्धों की तलाश तेज कर दी है और मामले की सघन जांच की जा रही है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा के संबंध में 3 प्रमुख जानकारियां रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश सरकारी पक्ष को दिया है। अदालत ने विशेष रूप से पूछा है कि क्या हाई कोर्ट सहित सभी अदालतों और उनके आवासीय परिसरों का कोई ‘सुरक्षा ऑडिट’ किया गया था और यदि हां, तो यह आखिरी बार कब किया गया था? अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और इस मामले से जुड़ी जानकारी के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) या अन्य आवश्यक अधिकारी से निर्देश लिए जाएं।