Nagpur Road Safety: नागपुर में थ्री सीटर ऑटो में 10 सवारी बैठाने की समस्या बढ़ती जा रही है। शहर की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था का हाल कुछ ऐसा है कि नियम सबको दिखाई देते हैं, लेकिन मानने की जिम्मेदारी जैसे किसी की नहीं है। 3 सवारी की क्षमता वाले ऑटोरिक्शा में जब 8 से 10 लोग ठूंसकर बैठाए जाते हैं और वे शहर की व्यस्त सड़कों पर दौड़ते रहते हैं, तब न तो कानून याद आता है और न ही सुरक्षा।
हालांकि जैसे ही कोई हादसा होता है, अचानक से नियमों की याद आ जाती है और कार्रवाई की औपचारिकता शुरू हो जाती है। शहर के लगभग हर प्रमुख चौकचौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और ट्रैफिक पुलिस भी तैनात रहती है। इसके बावजूद क्षमता से कई गुना ज्यादा सवारियों को लेकर दौड़ते ऑटो किसी को नजर नहीं आते।
शहर में रोजाना हजारों ऑटो सड़कों पर दौड़ते हैं। इनमें से कई ऑटो ऐसे होते हैं जिनमें क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जाती हैं। मजदूर, स्कूली बच्चे और कम दूरी तय करने वाले यात्री अक्सर इसी सवारी का सहारा लेते हैं क्योंकि यह सस्ती और जल्दी मिलने वाली सुविधा है। हालांकि यही सस्ती सवारी कई बार यात्रियों के लिए खतरा बन जाती है। दुर्घटना होने पर सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं यात्रियों को उठाना पड़ता है जो मजबूरी में इस तरह की सवारी करते हैं।
ऐसा नहीं है कि समस्या केवल ऑटोरिक्शा तक सीमित है। शहर में बड़ी संख्या में ईरिक्शा भी बिना लाइसेंस या नियमों का पालन किए बिना सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कई ईरिक्शा में भी क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाई जाती हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई भी कम ही देखने को मिलती है। परिणाम यह है कि शहर की व्यस्त सड़कों पर यातायात व्यवस्था और भी अव्यवस्थित होती जा रही है।
ट्रैफिक पुलिस समयसमय पर जांच अभियान जरूर चलाती है, लेकिन यह सख्ती अक्सर कुछ दिनों तक ही दिखाई देती है। जैसे ही मामला शांत होता है, फिर वही पुराना ढर्रा शुरू हो जाता है। जान जाने के बाद ही खुलेगी नींद।