नागभीड़ नगर परिषद के 13 कर्मचारी नियमितीकरण से वंचित, शासन से लगाई गुहार
Employee Regularization: चंद्रपुर जिले के नागभीड़ नगर परिषद क्षेत्र के 13 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से नियमितीकरण और न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Nagbhid Municipal Council (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Nagbhid Municipal Council: नगर परिषद के तत्कालीन प्रशासक की कथित लापरवाही और गलत निर्णय के कारण 13 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को शासकीय सेवा में नियमित होने के अवसर से वंचित रहना पड़ा। इस कथित अन्याय के खिलाफ ये कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों ने मांग की है कि नगर विकास विभाग इस पूरे मामले की गहन जांच कर उन्हें न्याय दिलाए।
11 अप्रैल 2016 को नागभीड़ नगर परिषद का गठन किया गया था, जिसमें आसपास की ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया था। नियमों के अनुसार, संबंधित ग्राम पंचायतों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नगर परिषद के स्थापना ढांचे में समायोजित किया जाना आवश्यक था। आरोप है कि तत्कालीन प्रशासक एवं तहसीलदार समीर माने ने केवल दो कर्मचारियों को नियमित किया, जबकि शेष 13 कर्मचारियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
शासन से राहत और न्याय की उम्मीद
अपने अधिकारों की मांग को लेकर ये कर्मचारी पिछले कई वर्षों से प्रशासन, विधायक, सांसद और मंत्रियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। हाल ही में कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी से मुलाकात की। बताया जाता है कि गडकरी ने इस मामले में नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदारी को पत्र भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं।
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नियमित सेवा का इंतजार जारी
न्याय की मांग कर रहे कर्मचारियों में विशाल कोवे, मल्या आत्राम, संजय हेमणे, सोमा आत्राम, लखन मसराम, देवानंद बोरकर, मोहन मेश्राम, प्रशांत गायधने, विश्वनाथ जिवतोडे, अतुल जिवतोडे, राहुल बोरकर, कैलास गजभे, रवींद्र समर्थ और अशोक रामटेके शामिल हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि शासन इन कर्मचारियों को कब तक राहत और न्याय प्रदान करता है।
