कांग्रेस विधायक जिशान सिद्दीकी अजित पवार के साथ
मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव नवंबर महीने में होने की संभावना है। राज्य के दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच सीटों का बंटवारा अभी नहीं हुआ है लेकिन सभी दलों में इच्छुकों की कतार लंबी है। बात बांद्रा पूर्व की करें तो यहां के मौजूदा विधायक जीशान सिद्दीकी के सामने कड़ी चुनौती है। कांग्रेस के विधायक जीशान ने पाला बदल कर महायुति खेमे में चले गए है। अब वे उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की पार्टी से महायुति के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे। लेकिन लोकसभा चुनाव में महायुति के उम्मीदवार एड. उज्ज्वल निकम, मविआ की वर्षा गायकवाड से काफी पीछे रह गए थे।
बांद्रा- पूर्व विधानसभा क्षेत्र शिवसेना का गढ़ रहा है। हालांकि 2019 विधानसभा चुनाव में अपनी तत्कालीन विधायक तृप्ति सावंत का टिकट काट कर शिवसेना के उद्धव ठाकरे ने पूर्व महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर को उम्मीदवारी दे दी। उद्धव के निर्णय के खिलाफ तृप्ति मैदान में निर्दलीय कूद पड़ी। तृप्ति को दिवंगत पति विधायक रहे प्रकाश (बाला) सावंत की सहानुभूति का लाभ मिला और शिवसेना के वोट बंट गए। इससे उद्धव का दांव उल्टा पड़ गया और परिणाम स्वरूप जीशान जीत गए थे। लेकिन इस बार जीशान की राह आसान नहीं है।
तृप्ति बाद में बीजेपी में शामिल हो गईं और ऐसा कहा जा रहा है कि उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तब उन्हें बांद्रा- पूर्व से उम्मीदवारी का आश्वासन दिया था। इसलिए बांद्रा पूर्व सीट पर बीजेपी पूरी प्रतिबद्धता के साथ दावा कर रही है। दूसरी ओर शिवसेना (शिंदे गुट) के विभाग प्रमुख कुणाल उर्फ बंटी सरमलकर तीन चार वर्षों से लोगों के बीच सक्रिय है। उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उम्मीदवारी दिए जाने की मांग है लेकिन जीशान के महायुति में आने से रस्साकशी और बढ़ गई है। यही हाल महाविकास आघाड़ी में भी है। मविआ में शामिल उद्धव गुट जीशान की जीत को टेक्निकल बता रहा है और ठाकरे का गृह सीट क्षेत्र होने के कारण पार्टी मजबूती से दावा ठोक रही है। सूत्रों का कहना है कि उद्धव गुट यहां से वरुण सरदेसाई को चुनाव लड़ाना चाहते हैं, जबकि 2019 में जीशान की जीत के कारण मौजूदा विधायक के फॉर्मूले के आधार पर कांग्रेस इस सीट पर दावा ठोक रही है। कांग्रेस का यह तर्क भी है कि 2009 से पहले यह क्षेत्र उसी का गढ़ हुआ करता था।
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2014 लोकसभा चुनाव को अपवाद छोड़ दें तो बांद्रा पूर्व में कांग्रेस ने हमेशा से बाहरी को उम्मीदवारी दी है। हालांकि यहां के कार्यकर्ता हर बार स्थानीय उम्मीदवार की मांग करते हैं लेकिन किसी स्थानीय उम्मीदवार पर उनमें सहमति नहीं बन पाती है। फिलहाल बांद्रा पूर्व से कांग्रेस के सचिन सावंत, भाई जगताप, अर्जुन सिंह, शिवजी सिंह, हाजी इब्राहिम शेख (भाईजान), डॉ। उज्जवला जाधव, एड. सुप्रिया पाठक, राधेश्याम चव्हाण, राजेश रिडलान आदि ने कांग्रेस के अंतर्गत सर्वे के दौरान चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। इनमें अर्जुन सिंह और शिवजी सिंह उत्तरभारतीय हैं तो वहीं भाईजान अल्पसंख्यक होने के आधार पर टिकट मांग रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में सचिन सावंत का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है।
मुंबई कांग्रेस उपाध्यक्ष तथा पीसीसी सदस्य अर्जुन सिंह ने कहा, “मैं 1976 से पार्टी का कार्यकर्ता रहा हूं। मैं पार्टी और क्षेत्र की जनता की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहा हूं। 2007 में मुझे मनपा चुनाव का टिकट मिला था लेकिन अपनों की बगावत के कारण मैं हार गया। मुझे उम्मीद ही कि इस बार पार्टी बांद्रा-पूर्व से मेरी उम्मीदवारी के बारे में विचार करेगी।”
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शिवसेना (शिंदे गुट) के कुणाल सरमलकर ने कहा, “बांद्रा -पूर्व विधानसभा सीट शिवसेना का गढ़ और बालासाहेब का निवास क्षेत्र है। हम यहां लगातार लोगों की समस्या हल करने की कोशिश करते रहे हैं। इसलिए सीएम शिंदे की शिवसेना को ही यहां उम्मीदवारी मिलनी चाहिए।”
पूर्व विधायक तृप्ति बाला सावंत ने कहा, “मेरे दिवंगत पति प्रकाश बाला सावंत लगभग 40 वर्षों तक बांद्रा-पूर्व में जनसेवा के कार्यों में जुड़े रहे। मैं भी करीब पिछ 15 वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय हूं। हमने कभी जात-पात, मजहब का भेद नहीं किया। हम यहां की हर बस्ती के लोगों को और उनकी समस्याओं के बारे में जानते हैं। हमने पहले पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे को पराजित किया था तथा 2019 में निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद भी हमें 24 हजार से अधिक मत मिले थे। इस क्षेत्र में हमारा अपना वोट बैंक है। हमें विश्वास है कि हमारी पार्टी के वरिष्ठ लोग निश्चित रूप से सही निर्णय लेंगे।”
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