Women Reservation Bill: बिल फेल होने पर NDA को झटका, विपक्ष पर वार
Women Reservation Bill से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल संसद में पारित नहीं हो सका, जिससे सियासी घमासान तेज हो गया। मुंबई में विरोध प्रदर्शन के बीच नेताओं के तीखे बयान सामने आए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
सुनेत्रा पवार Vs प्रियंका चतुर्वेदी (सौ. डिजाइन फोटो )
Sunetra Pawar Vs Priyanka Chaturvedi On Women Reservation Bill: महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका, जिससे देश की राजनीति में हलचल मच गई है।
इस बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट मिलने के कारण यह पारित नहीं हो पाया। इस घटनाक्रम को सत्ताधारी गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पिछले कई वर्षों से संसद में मजबूत स्थिति रखने वाले एनडीए को इस बार जरूरी समर्थन नहीं मिल सका। इसके बाद महाराष्ट्र में भी सियासी माहौल गर्म हो गया है।
सम्बंधित ख़बरें
मानसून के ट्रेलर से ही डूबा मुंबई का कुख्यात अंधेरी सबवे; क्यों करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं सुलझ रही समस्या?
Sunil Gavaskar ने जब चूमे 850 बच्चों के माथे, रो पड़े माता-पिता; ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ ने रची नई मिसाल
महाराष्ट्र ATS-दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मुंबई से हुजैफा गिरफ्तार, दाऊद के करीबी के संपर्क में था संदिग्ध
मुंबई में बार-बार बिजली गुल होने पर BEST का बड़ा फैसला, 690 कर्मचारियों की होगी भर्ती
शिवसेना गुटों के बीच टकराव
Priyanka Chaturvedi ने बिल पारित न होने पर नाराजगी जताई और अपनी पार्टी के रुख पर सवाल उठाए। वहीं Shiv Sena ने मुंबई में विरोध प्रदर्शन कर इंडिया गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोला।
नेताओं के तीखे बयान
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति’ इसका जवाब देगी। उन्होंने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की जरूरत पर जोर दिया।
आदित्य ठाकरे का अलग रुख
वहीं आदित्य ठाकरे ने इस विधेयक को लेकर अलग राय रखी। उनका कहना है कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो लोकतंत्र की पूर्ण पराजय होती। उनके इस बयान ने बहस को और तेज कर दिया है।
मुंबई में विरोध प्रदर्शन
बिल के पारित न होने के बाद मुंबई में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। अलग-अलग राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए, जिससे माहौल और गरमा गया।
ये भी पढ़ें :- Devendra Fadnavis सरकार का बड़ा फैसला, ‘एज्युसिटी’ और ‘मेडिसिटी’ से खुलेगा वैश्विक शिक्षा का रास्ता
आगे की राजनीति पर असर
महिला आरक्षण बिल के मुद्दे ने एक बार फिर सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है, खासकर 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए।
