उद्धव ठाकरे ने अंबादास दानवे पर ही क्यों जताया भरोसा? जानें MLC उम्मीदवार बनाने के पीछे की 5 बड़ी वजहें

Ambadas Danve MLC Candidate: शिवसेना (UBT) ने विधान परिषद चुनाव के लिए अंबादास दानवे को उम्मीदवार घोषित कर सबको चौंका दिया है। आखिर क्यों उद्धव ठाकरे ने बड़े चेहरों को छोड़ दानवे को चुना?
Reasons Behind Ambadas Danve MLC Candidate
उद्धव ठाकरे व अंबादास दानवे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Reasons Behind Ambadas Danve MLC Candidate: महाराष्ट्र की राजनीति में शह-मात का खेल तेज हो गया है। आगामी विधान परिषद चुनाव के लिए शिवसेना (यूबीटी) ने अंबादास दानवे को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। इस घोषणा ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उद्धव ठाकरे आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बेहद सधी हुई बिसात बिछा रहे हैं।

अंबादास दानवे के उम्मीदवारी घोषित होने के बाद महाविकास आघाड़ी में विरोध के स्वर उठे थे। कांग्रेस ने दानवे की उम्मीदवारी को लेकर सवाल खड़े किए। हालांकि गुरुवार को MVA की बैठक के बाद मामला सुलझ गया। उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को फोन करके अपनी बात रखी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने मध्यस्थता कराकर मामला को शांत कराया।

अब लोगों में मन में सवाल पैदा हो रहा है कि जब शिवसेना (यूबीटी) के खाते में एक ही सीट आनी है, तो खुद उद्धव ठाकरे या फायरब्रांड नेता सुषमा अंधारे को दरकिनार कर अंबादास दानवे पर भरोसा क्यों जताया गया। आइए जानते हैं इसके पीछे की पांच बड़ी वजहें।

अंबादास दानवे को मिला वफादारी का फल

अंबादास दानवे शिवसेना (यूबीटी) के उन नेताओं में से हैं जिन्होंने जमीनी स्तर पर मराठवाड़ा क्षेत्र में पार्टी को जीवित रखा है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में हुए विद्रोह के बाद भी दानवे ने उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ा। उन्हें उम्मीदवार बनाकर पार्टी अपने कैडर को यह संदेश देना चाहती है कि वफादारी का फल मिलता है।

आक्रामक विपक्ष की भूमिका

विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अंबादास दानवे ने सरकार को कई बार घेरा है। उनके पास विधायी कार्यों का गहरा अनुभव है और वे सदन में अपनी बात मजबूती से रखने के लिए जाने जाते हैं। पार्टी को एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो सीधे सत्ता पक्ष से टकरा सके।

जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण

छत्रपति संभाजीनगर और आसपास के जिलों में दानवे का दबदबा है। मराठा आरक्षण आंदोलन और क्षेत्र की समस्याओं पर उनकी पकड़ को देखते हुए, ठाकरे गुट उन्हें एक बड़े चेहरे के रूप में पेश कर रहा है ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में इसका लाभ मिल सके।

पार्टी संगठन के विस्तार पर जोर

पहले ऐसी अटकलें थीं कि उद्धव ठाकरे खुद यह चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, उद्धव गुट ने अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद में विपक्ष के पूर्व नेता अंबादास दानवे का नाम आगे बढ़ाकर संगठन पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत दिया है। इससे पार्टी कैडर में यह संदेश जाएगा कि उद्धव ठाकरे खुद की बयाज आम कार्यकर्ता को महत्व दे रहे हैं।

क्या महायुति का था डर?

राजनीतिक पंडित यह भी कयास लगा रहे हैं कि अंबादास दानवे को MLC प्रत्याशी बनाने के पीछे एक डर काम कर गया हो। जैसे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी में टूट हुई क्या ऐसा ही कुछ अंबादास दानवे करने की फिराक में थे। किसानों के मुद्दे को लेकर चर्चा में आए बच्चू कडू को एकनाथ शिंदे ने अपने पाले में करके इसके संकेत दिए हैं। सियासी गलियारों में इस बात की भी चर्चा हो रही है कि क्या उद्धव ठाकरे को इस बात डर था कि अंबादास दावने भी ऐसा कुछ कर सकते हैं?

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