महाराष्ट्र सरकार ने दी Virar Alibaug MMTC Project को मंजूरी, 90 मिनट घटेगा सफर

Virar Alibaug MMTC Project: मुंबई महानगर क्षेत्र में ट्रैफिक कम करने और कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के पहले चरण को मंजूरी दे दी है।
Virar Alibaug MMTC Project
विरार-अलीबाग कॉरिडोर परियोजना (सौ. सोशल मीडिया )
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Virar Alibaug MMTC Project: राज्य सरकार ने मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने और प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को जोड़ने के उद्देश्य से 14 लेन बाले विरार अलीबाग मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (एमएमटीसी) के पहले चरण को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है।

यह महत्वाकांक्षी एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (जेएनपीए), नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आपस में जोड़ेगा, शहरी विकास विभाग की तरफ से जारी शासनादेश के अनुसार, 126।06 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के पहले चरण की अनुमानित लागत 31,793।47 करोड़ रुपये है।

सरकारी आदेश के अनुसार, कुल परियोजना लागत में 21,533.66 करोड़ रुपये निर्माण लागत के अलावा महंगाई वृद्धि, आकस्मिक खर्च, वित्तीय व्यय, जीएसटी, बीमा और निर्माण अवधि का ब्याज शामिल है। इसके अलावा, जून 2025 में कैबिनेट ने भूमि अधिग्रहण के लिए 22,250 करोड़ रुपये और ब्याज देनदारियों के लिए 14,763 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, जिससे पहले चरण की कुल अनुमानित लागत 37,013 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

यात्रा में 90 मिनट की कमी यह कॉरिडोर वसई, भिवंडी, कल्याण, अंबरनाथ, पनवेल, उरण, पेण और अलीबाग तालुकों के 104 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके माध्यम से एनएच 48 (मुंबई-अहमदाबाद), एनएच-848 (मुंबई आगरा), एनएच-61 (कल्याण-मुरबाड निर्मल), मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे, मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे और एनएच-66 (मुंबई गोवा हाईवे) सहित कई प्रमुख राजमार्गों और एक्स्प्रेसवे को जोड़ा जाएगा।

मार्ग पर नौ इंटरचेंज प्रस्तावित हैं। इस परियोजना से मुंबई की व्यस्त सड़क व्यवस्था पर दबाव कम होने, यात्रा समय में लगभग 90 मिनट की कमी आने और बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स हब तथा एमएमआर की आगामी परियोजनाओं तक बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद है।

पनवेल में जमीन अधिग्रहण की उलझन

विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर के लिए पनवेल तालुका के मोरबे गांव में जमीन अधिग्रहण रेट में 2 लाख 20 हजार रुपये प्रति गुंठा की कमी से किसान नाराज हैं। किसानों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। क्योंकि नए नोटिफिकेशन में पहले घोषित रेट से कम मुआवजा तय किया गया है। यह भी सवाल उठ रहा है कि एक ही जिलाधिकारी के कार्यकाल में 2 अलग-अलग रेट कैसे तय हो गाए, अगर बची हुई जमीन नए रेट के हिसाब से अधिग्रहित की जाती है, तो यह राज्य का पहला प्रोजेक्ट होने की संभावना है, जहां दो अलग-अलग रेट पर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।

पहले चरण में बनेगा 96.41 किमी लंबा हिस्सा

पहले चरण में वसई तालुका के नवकार से पेग तालुका के बालावली तक 96.47 किलोमीटर लंबा हिस्सा बनाया जाएगा। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) को इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत डिजाइन, निर्माण, वित्, संचालन और हस्तांतरण आधार पर लागू किया जाएगा। यह निर्मारा 11 मार्च को हुई कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी की बैठक में मिली मंजूरी के बाद लिया गया है।

परियोजना को पूरा करने के लिए तीन वर्ष की समय सीमा

  • सरकार ने परिवीजना लागत का 19.80 प्रतिशत यानी 6,259.32 करोड़ रुपये वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएस) के रूप में मंजूर किया है। यह प्रस्ताव कार और जीप के लिए 765 रुपये टोल दर तथा 40 वर्ष की रियायत अवधि के आधार पर तैयार किया गया है।
  • अब इस प्रस्ताव को केंद्र की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ओजल कमेटी (पीपीपीएसी) के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कॉरिडोर पर टोल वसूली पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से होगी, जिसमें फास्टैग, जीपीएस और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
  • टोल शुल्क तय की गई नी इंटरचेज के माध्यम से तथ की गई वास्तठिक यात्रा दूरी के आधार पर लिया जाएगा, राज्य सरकार ने परियोजना को पूरा करने के लिए तीन वर्ष की समय सीमा तथ की है। साथ ही, मोटे करंजाडे के पास एनएचएआई की वीएमई स्पर परियोजना से जुड़े साझा हिस्से को डेढ़ वर्ष के भीतर प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश भी दिए गए है।
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