12000 करोड़ का साम्राज्य, फिर 2BHK में रहने को क्यों हुआ मजबूर? जानिए गुमनामी में मरे बिजनेस टायकून की कहानी
Vijaypat Singhania Story: 'टेक्सटाइल टाइकून' रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। साम्राज्य खड़ा करने से लेकर तंगहाली में दिन गुजारने तक, जानिए उनकी अनकही कहानी।
- Written By: आकाश मसने
विजयपत सिंघानिया (सोर्स: सोशल मीडिया)
Raymond Owner Vijaypat Singhania Biography: भारत के बिजनेस जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। Raymond समूह को शून्य से शिखर तक पहुंचाने वाले और देश के ‘टेक्सटाइल टाइकून’ कहे जाने वाले विजयपत सिंघानिया अब हमारे बीच नहीं रहे। 28 मार्च को 87 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे और रेमंड के वर्तमान प्रमुख गौतम सिंघानिया ने साझा की है। बताया गया है कि 29 मार्च को दोपहर 3 बजे मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
विजयपत सिंघानिया की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। अपने 87 साल के जीवनकाल में उन्होंने अनगिनत उतार-चढ़ाव देखे। उन्होंने सफलता की ऊंचाइयों को छुआ, लेकिन साथ ही प्यार में मिले धोखे को भी सहा। अरबों डॉलर की संपत्ति और ‘जेके हाउस’ के मालिक को अपने अंतिम दिनों में किराए के घर में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। आइए जानते है उनकी पूरी कहानी।
शून्य से खड़ा किया रेमंड का साम्राज्य
विजयपत सिंघानिया की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। रेमंड की शुरुआत असल में 1925 में ठाणे की एक छोटी सी वुलन मिल ‘वाडिया मिल’ के रूप में हुई थी, जहां भारतीय सेना के लिए वर्दी सिली जाती थी। साल 1980 में जब विजयपत सिंघानिया ने इसकी कमान संभाली, तो उन्होंने अपनी दूरदर्शिता से इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने ‘द कंप्लीट मैन’ और ‘फील्स लाइक हैवन’ जैसे नारों के साथ रेमंड को न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के घर-घर में एक प्रतिष्ठित नाम बना दिया।
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एक हस्ताक्षर से बदल गई तकदीर
सफलता की बुलंदियों को छूने वाले विजयपत सिंघानिया के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ साल 2015 में आया। उन्होंने अपने प्यार और भरोसे के चलते अपनी पूरी कंपनी और सारे शेयर्स अपने बेटे गौतम सिंघानिया के नाम कर दिए। उस वक्त उन शेयर्स की वैल्यूएशन करीब 1000 करोड़ रुपये थी और पूरी रेमंड कंपनी की वैल्यू लगभग 12,000 करोड़ रुपये थी। उन्होंने सोचा था कि बुढ़ापे में बेटा उनकी देखभाल करेगा, लेकिन यह फैसला उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुआ।
बेटे गौतम सिंघानिया के साथ विजयपत सिंघानिया (सोर्स: सोशल मीडिया)
37 मंजिला महल से 2BHK के किराए के घर तक
कंपनी सौंपने के कुछ समय बाद ही पिता और बेटे के रिश्तों में ऐसी कड़वाहट आई कि विजयपत सिंघानिया को अपने ही बनाए साम्राज्य से बाहर कर दिया गया। जिस व्यक्ति ने मुंबई के मालाबार हिल में 37 मंजिला आलीशान ‘जेके हाउस’ बनवाया था, उसे ही उस घर से बाहर निकाल दिया गया। केवल घर ही नहीं, बल्कि उनसे कार, ड्राइवर और यहां तक कि उनके नाम के साथ जुड़ा ‘चेयरमैन एमेरिटस’ का पद भी छीन लिया गया।
पत्नी के साथ विजयपत सिंघानिया (सोर्स: सोशल मीडिया)
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अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, अरबों की संपत्ति के मालिक रहे विजयपत सिंघानिया अपनी पत्नी के साथ एक मामूली 2BHK किराए के घर में रहने को मजबूर थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में भावुक होकर कहा था कि “गौतम को सब कुछ सौंपना मेरी जिंदगी की सबसे भयंकर भूल थी” और उनके बेटे को उन्हें सड़क पर देखकर खुशी होती है।
आसमान के भी खिलाड़ी थे विजयपत
विजयपत सिंघानिया केवल कपड़ों के कारोबार तक सीमित नहीं थे, उन्हें रोमांच का भी बेहद शौक था। उनके पास 5000 घंटों से अधिक का फ्लाइट एक्सपीरियंस था। 67 साल की उम्र में उन्होंने हॉट एयर बैलून में दुनिया की सबसे ऊंची उड़ान भरने का विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था।
विजयपत सिंघानिया का जाना एक युग का अंत है। उन्होंने टेक्सटाइल इंडस्ट्री को नई पहचान दी, लेकिन उनका निजी जीवन उन माता-पिता के लिए एक सबक छोड़ गया जो अपनी पूरी जमापूंजी अपनी आंखों के सामने बच्चों के नाम कर देते हैं।
