BRICS डिनर में नॉनवेज नहीं परोसे जाने पर शिवसेना UBT का सवाल, उद्धव ठाकरे ने कहा- खाने की पसंद थोपना ठीक नहीं

Uddhav Thackeray On BRICS Vegetarian Dinner Menu: डिनर में विदेशी मेहमानों को शाकाहारी खाना परोसे जाने पर शिवसेना UBT ने केंद्र की आलोचना की और खानपान की पसंद को व्यक्तिगत स्वतंत्रता बताया।
Uddhav Thackeray Targets Centre Over BRICS Dinner Menu
उद्धव ठाकरे(सोर्सः एआई)
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Shiv Sena UBT Targets Centre Over BRICS Dinner: डिनर में विदेशी मेहमानों को शाकाहारी खाना परोसे जाने पर शिवसेना UBT ने केंद्र की आलोचना की और खानपान की पसंद को व्यक्तिगत स्वतंत्रता बताया।नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स समिट में विदेशी मेहमानों को सिर्फ शाकाहारी खाना परोसे जाने पर सियासत शुरू हो गई है।

शिवसेना (UBT)  प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आज केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मेहमानों पर खाने की पसंद थोपने जैसा है। पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा कि खाने की पसंद व्यक्तिगत आजादी का मामला है और इसे सरकार या किसी राजनीतिक संगठन को तय नहीं करना चाहिए।

संपादकीय में 12 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित गाला डिनर पर आपत्ति जताई गई, जहां 11 सदस्यीय ब्रिकिस समूह के नेताओं को सिर्फ शाकाहारी मेन्यू परोसा गया था। इस कदम को विश्व नेताओं पर खानपान की पसंद थोपना बताया गया। सामना में लिखा गया कि चाहे शाकाहारी हो या मांसाहारी, खाने की पसंद व्यक्तिगत स्वतंत्रता है।

BRICS गाला डिनर की मेन्यू

मेन्यू में खांडवी, मशरूम कबाब, पनीर लबाबदार, मिलेट पुलाव, गुजराती शैली की ढोकली बेले सारू, जलेबी और फिरनी जैसे व्यंजन शामिल थे। संपादकीय में दावा किया गया कि विदेशी मेहमानों के सामने केवल शाकाहारी विकल्प रखना उनकी खानपान की पसंद पर रोक लगाने जैसा है।

गांधीजी और खानपान की पसंद का दिया उदाहरण

शिवसेना (UBT) ने संपादकीय में महात्मा गांधी के संदर्भ का भी उल्लेख किया। पार्टी ने कहा कि गांधीजी स्वयं शाकाहारी थे, लेकिन उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पसंद दूसरों पर नहीं थोपी। संपादकीय में खान अब्दुल गफ्फार खान के सेवाग्राम दौरे और पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की रूस यात्रा के उदाहरण देते हुए अलग-अलग खानपान और स्थानीय परंपराओं के सम्मान की बात कही गई।

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शी जिनपिंग की यात्रा का भी जिक्र

संपादकीय में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महाबलीपुरम यात्रा का उदाहरण देते हुए दावा किया गया कि उस दौरान नॉनवेज व्यंजनों सहित कई तरह के भोजन की व्यवस्था की गई थी।

इसके अलावा मुंबई में नॉनवेज खाने वालों को घर किराये पर लेने में कथित भेदभाव और स्कूलों के मिड-डे मील में अंडे को लेकर चल रही बहस का भी जिक्र किया गया। शिवसेना (UBT) ने भारत की विविध खानपान संस्कृति को बनाए रखने की बात कही।

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