

Uddhav Thackeray Speech: महाराष्ट्र विधान परिषद के 9 सदस्यों का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है, जिसके उपलक्ष्य में आयोजित विदाई समारोह में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे बेहद भावुक नजर आए। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, मुख्यमंत्री के तौर पर बिताए गए समय और वर्तमान परिस्थितियों पर खुलकर बात की।
ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वे स्वभाव से एक कलाकार हैं, जिन्हें परिस्थितियों ने राजनीति के मैदान में उतार दिया। इस विदाई भाषण के दौरान उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और मौजूदा सरकार के सामने विकास से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं।
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन की शुरुआत एक कलाकार के नजरिए से की। उन्होंने कहा, "मेरा स्वभाव मूल रूप से एक कलाकार का है, राजनीति का नहीं। मैं इस सदन में मुख्यमंत्री के रूप में आया था, तब कई जिम्मेदारियां अचानक सामने आईं जिनसे भागना संभव नहीं था।" उन्होंने चुटकी लेते हुए सवाल भी किया कि जब लोग उनके स्वभाव को इतनी अच्छी तरह जानते थे, तो ऐसी कौन सी परिस्थितियां बनीं कि उन्हें राजनीति में 'हाथ पकड़ना' पड़ा। उन्होंने 'वर्षा' बंगला छोड़ते समय जनता से मिले प्यार को अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
अपने विदाई भाषण के अंत में उद्धव ठाकरे ने भविष्य के प्रोजेक्ट्स को लेकर सरकार के सामने तीन बड़ी मांगें रखीं। उन्होंने मराठी भाषा भवन के निर्माण को गति देने, गिरगांव चौपाटी पर मराठी रंगभूमि गैलरी बनाने और वर्ली डेयरी की जगह पर विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र विकसित करने का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने 'बुवा शक्ति' (ढोंगी बाबाओं) के बजाय 'युवा शक्ति' पर भरोसा जताने की बात कही। ठाकरे ने कहा कि असली चमत्कार कोई बाबा नहीं, बल्कि देश का काबिल युवा ही कर सकता है।
ठाकरे ने अपने कार्यकाल के सहयोगियों को याद करते हुए अजित पवार की कार्यशैली की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने हमेशा मजबूती से साथ दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भाषण का जिक्र करते हुए उन्होंने संत ज्ञानेश्वर का उदाहरण दिया और वर्तमान राजनीति में मूल्यों के पतन पर कटाक्ष किया। उन्होंने विपक्ष के नेता की नियुक्ति की मांग उठाते हुए कहा कि रास्ते भले अलग हो जाएं, लेकिन लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि चुनाव और सदन में मुलाकातें होती रहनी चाहिए।