

Uddhav Thackeray On Kisan Karj Mafi: महाराष्ट्र में बारिश न होने और सूखे के कारण किसानों पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इस गंभीर स्थिति को लेकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को कोई राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।
पत्रकारों से बात करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि पिछले साल सरकार ने 31 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की थी और खराब हुई जमीन के लिए प्रति हेक्टेयर 3.5 लाख रुपये देने का वादा किया था। ठाकरे ने सवाल उठाया, "हम जानना चाहते हैं कि इस 31 हजार करोड़ रुपये में से वास्तव में कितने किसानों के हाथों में मदद पहुंची है? सरकार को इसका पूरा हिसाब महाराष्ट्र की जनता के सामने रखना चाहिए।"
उद्धव ठाकरे ने कहा कि मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मानसून की शुरुआत में ही सूखे का अनुमान जताया था। जब खतरे का पूर्वाभास था, तो सरकार ने सूखा निवारण के लिए पहले से क्या तैयारियां कीं? इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना चाहिए।
महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था, तब बिना किसी कठिन शर्तों के 15 दिनों के भीतर किसानों का 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया गया था। आज किसान यही बात याद कर रहे हैं।
उद्धव ठाकरे ने मांग की कि वर्तमान सरकार ने जो कर्जमाफी की योजना घोषित की है, उससे कितने किसानों को वास्तविक लाभ मिला है, सरकार उसकी पारदर्शी सूची जारी करे।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अब अगर बारिश भी हो जाए, तो भी इस सूखे की वजह से बर्बाद हो चुकी फसलों को बचाया नहीं जा सकता। किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। मैंने खुद कई बार किसानों के खेतों का दौरा किया है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने भी वहां का दौरा किया है।
उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दौरे के दौरान सामने आई तस्वीरों पर बात करते हुए कहा कि हम तस्वीरें देखते हैं रोते हुए किसान को दिलासा देना, उन्हें अकेला न छोड़ने का वादा करना, लेकिन किसानों को असल भरोसे की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का आकलन 5 अक्टूबर के बाद ही शुरू होगा। आप किस बात का इंतजार कर रहे हैं? 5 अक्टूबर क्यों?
उद्धव ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि आप कहते हैं कि आप इस बारे में दो-तीन दिन में घोषणा करेंगे, तो फिर कैबिनेट की बैठक क्यों बुला रहे हैं? असल में इन कैबिनेट बैठकों में क्या होता है? क्या सूखे का जायजा लेने के दौरे सिर्फ काजू-बादाम खाने के लिए होते हैं? हमें यह समझ नहीं आता कि आपके साथ इन दौरों पर जाने वाले अधिकारी, जन-प्रतिनिधि और मंत्री-सहयोगी सच में किसानों की बदहाली की परवाह करते हैं या नहीं।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ जगहों का दौरा तो बस दस मिनट में ही निपटा दिया गया; तो फिर ऐसा दिखावा क्यों? इसका मकसद क्या है? आप किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं? अगर सरकार सिर्फ NDRF और SDRF की मदद पर निर्भर नहीं है, तो वह सूखे की घोषणा क्यों नहीं करती?
शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब सब कुछ सूखा-सूखा नजर आ रहा हो, तो अपनी आंखों से देखी गई स्थिति ही पैमाना होनी चाहिए। किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है, फसलें जलकर राख हो गई हैं। ऐसे हालात में आप किस पैमाने की तलाश कर रहे हैं और किसका इंतजार कर रहे हैं? असल में कितने किसानों का कर्ज माफ हुआ है? "माफी" उनका शब्द है, जबकि "मुक्ति" मेरा; लेकिन क्या पैसा सच में किसानों के हाथों तक पहुंचा है?