
उद्धव ठाकरे (सौ. डिजाइन फोटो )
Mumbai News In Hindi: मुंबई में विपक्षी गठबंधन मविआ के टूटने के एक दिन बाद महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक एक अप्रत्याशित घटना देखने को मिली है।
कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी के बीच गठबंधन टूटने की अटकलों के बीच, राज्य सरकार ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट का पुनर्गठन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना यूबीटी पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे को एक बार फिर से न्यास का अध्यक्ष बना दिया है।
हैरानी की बात ये है कि महायुति सरकार में सहयोगी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के विरोध को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने उद्धव को यह जिम्मेदारी 5 वर्षों के लिए सौंपी है।
राजनीतिक विश्लेषक इस कदम को राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूजीटी) के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं।
दादर के शिवाजी पार्क परिसर में महापौर बंगले की जगह पर बन रहे दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के राष्ट्रीय स्मारक की देखरेख और प्रबंधन की जिम्मेदारी शिवसेना प्रमुख बालासाहव ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट को दी गई है।
ट्रस्ट में उद्धव के अलावा उनके पुत्र व विधायक आदित्य ठाकरे, शिवसेना यूबीटी के नेता सुभाष देसाई को भी स्थान दिया है। सदस्य के रूप में आदित्य ठाकरे और सचिव के रूप में सुभाष देसाई की नियुक्ति पांच साल के लिए की गई है, मविआ में शामिल कांग्रेस के मुंबई में स्वबल पर चुनाव लड़ने की घोषणा के ठीक बाद की गई।
इस नियुक्ति से राज्य में सियासी अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। माना जा रहा है कि इस तरह से सरकार ने ट्रस्ट में ठाकरे परिवार का प्रभुत्व बरकरार रखकर सरकार में अपने सहयोगी डीसीएम शिंदे को सख्त संदेश देने का प्रयास किया है।
सरकार के इस निर्णय को एक तरफ बीजेपी की ओर से उद्धव को दिए गए ‘दोस्ती के संदेश’ के रूप में देख रहा है, जिसका उद्देश्य भविष्य में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की गुंजाइश बनाना है। दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन में आई दरार का फायदा उठाते हुए बीजेपी ने यह भावनात्मक कदम उठाया है। तो वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि बीजेपी ने बालासाहेब की विरासत के प्रति सम्मान और स्मारक की परियोजना में निरंतरता बनाए रखने की आवश्यकता के रूप में यह निर्णय लिया है।
शिवसेना उद्धव बालासाहब ठाकरे (यूबीटी) पार्टी के पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों, चुनाव में एनडीए को मिली प्रचंड जीत और महागठबंधन को लगे बड़े झटके पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, उन्होंने बिहार के चुनावी गणित की ‘समझ से परे’ बताया और कटाक्ष करते हुए कटाक्ष कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान जिनकी सभाओं में कुर्सियां खाली थीं, उनकी सरकार बन गई।
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटों पर जीत मिली है, जबकि महागठबंधन को केवल 35 सीटें मिली हैं। इसे इंडिया गठबंधन को करारा झटका माना जा रहा है। बिहार के नतीजों पर बोलते हुए उद्धव ने कहा कि बिहार के चुनाव में जो जीते, उन्हें बधाई, लेकिन इसी के साथ-साथ उन्होंने उन्होंने तेजस्वी यादव की जनसभाओं में उमड़ी भीड़ का जिक्र करते हुए आचर्य व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि एक बात का मुझे आचर्य होता है कि तेजस्वी यादव की सभाओं को जो जबरदस्त प्रतिसाद मिल रहा था। वह प्रतिसाद असली था या एआई द्वारा बनाए गए लोग थे, यह पता नहीं चल रहा। अर्थात जिनकी सभाओं में अपार भीड़ होती है, उनकी सरकार नहीं आई और जिनकी सभाओं में कुर्सियां खाली रहती थीं।
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उनकी सरकार आई है। लोकतंत्र का ये इस नई गणित समझ से परे है। ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला बोलते हुए कहा कि हमारे मुख्यमंत्री कहते हैं कि ‘जो जीता वही सिकंदर’ लेकिन सिकंदर बनने के पीछे का रहस्य आज तक कोई समझ नहीं सका है।






