दशहरे पर ‘ठाकरे मिलन’? उद्धव-राज ठाकरे के एक मंच पर आने की अटकलें तेज, सचिन अहीर ने दिए बड़े संकेत
Mumbai News: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की बढ़ती नजदीकियों ने राजनीति में हलचल मचा दी है। सचिन अहीर ने संकेत दिया कि इस बार दशहरा रैली में दोनों ठाकरे बंधु एक साथ मंच साझा कर सकते हैं।
- Written By: सोनाली चावरे
उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे (pic credit; social media)
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा का विषय ठाकरे बंधुओं का संभावित मिलन है। शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की मुलाकातें हाल ही में बढ़ी हैं, जिसने सियासी गलियारों में नई हलचल मचा दी है।
कुछ ही समय पहले राज ठाकरे अपने बड़े भाई उद्धव ठाकरे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने उनके ननिहाल गए थे। इसके बाद गणेशोत्सव के दौरान उद्धव ठाकरे भी शिवतीर्थ पहुंचे और भगवान गणेश के दर्शन किए। इन मुलाकातों के बाद अब अटकलें तेज हैं कि आने वाले दशहरा उत्सव में दोनों भाई एक ही मंच पर दिखाई दे सकते हैं।
शिवसेना (उभयपक्ष) के नेता और विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर ने इस संभावना को और हवा दी है। एक मराठी न्यूज चैनल से बातचीत में अहीर ने कहा, “दशहरे पर आपको अच्छी खबर मिलेगी। यह भी संभव है कि राज ठाकरे को हमारी दशहरा रैली में आमंत्रित किया जाए।”
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अहीर ने आगे कहा कि उद्धव और राज ठाकरे का साथ आना सिर्फ दोनों दलों की मजबूरी नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति और जनता की भावना भी यही चाहती है। उनके मुताबिक, “अब गणेशोत्सव समाप्त हो चुका है और पितृ पक्ष शुरू हो गया है। उम्मीद है दशहरा तक कोई बड़ी खबर मिलेगी।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब शिवसेना (यूबीटी) और मनसे दोनों ही अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं और कार्यकर्ताओं को दिशा देने में जुटी हैं। अहीर ने कहा कि दशहरा समागम केवल राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देने वाला मंच होता है। अगर इस बार दोनों ठाकरे भाई एक साथ नजर आते हैं, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक क्षण होगा।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दशहरे पर उद्धव ठाकरे वाकई राज ठाकरे को मंच पर बुलाएंगे या नहीं, लेकिन संकेत यही मिल रहे हैं कि दोनों के बीच बर्फ पिघल रही है। अहीर ने यह भी जोड़ा कि, “उनके यहां भी सभाएं होती हैं। वे हमें भी आमंत्रित कर सकते हैं।”
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अगर ठाकरे बंधु दशहरा मंच पर साथ आते हैं तो यह न सिर्फ़ विपक्षी खेमे के लिए बड़ा झटका होगा, बल्कि राज्य की राजनीति में ‘न भूतो न भविष्यति’ घटना साबित होगी।
अब सभी की निगाहें 24 अक्टूबर को होने वाले दशहरा समागम पर टिकी हैं, जहां ठाकरे परिवार की राजनीतिक कहानी का नया अध्याय लिखा जा सकता है।
