‘बागी सांसदों को अलग गुट के रूप में मान्यता न दें…’, ठाकरे गुट की ओम बिरला के साथ मीटिंग में क्या-क्या हुआ?
Shiv Sena UBT MPs Delhi: दिल्ली में शिवसेना UBT के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। जानें ठाकरे गुट ने बागी सांसदों को अलग मान्यता न देने के लिए क्या कानूनी तर्क दिए।
- Written By: गोरक्ष पोफली
ठाकरे गुट के सांसदों की ओम विरला के साथ बैठक (सोर्स: सोशल मीडिया)
Thackeray Faction MPs Meet Om Birla: महाराष्ट्र की राजनीति का महासंग्राम अब देश की राजधानी दिल्ली के गलियारों में पूरी तीव्रता के साथ पहुंच गया है। शिवसेना यूबीटी में मची बड़ी भगदड़ के बीच, उद्धव ठाकरे के वफादार सांसदों ने अपनी पार्टी के अस्तित्व और संवैधानिक मर्यादाओं को बचाने के लिए मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर बगावत करने वाले सांसदों के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
बुधवार शाम करीब 5 बजे, सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उन अटकलों और चर्चाओं पर विराम लगाना था, जिसमें कहा जा रहा था कि उद्धव गुट के बागी सांसदों ने शिंदे गुट में शामिल होने के लिए आधिकारिक पत्र दिया है। बैठक के बाद अरविंद सावंत ने स्पष्ट किया कि लोकसभा अध्यक्ष को अब तक बगावत करने वाले सांसदों की ओर से कोई भी आधिकारिक पत्र या दस्तावेज प्राप्त नहीं हुआ है।
संविधान की 10वीं अनुसूची का दिया हवाला
इस मुलाकात के दौरान ठाकरे गुट के सांसदों ने बेहद आक्रामक और तकनीकी रुख अपनाया। सांसद अनिल देसाई ने संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) का कड़ा हवाला देते हुए कहा कि केवल विधिमंडल दल में दो-तिहाई बहुमत होना काफी नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक मूल राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलय नहीं हो जाता, तब तक अलग हुए गुट को स्वतंत्र मान्यता नहीं दी जा सकती। देसाई ने जोर देकर कहा कि बागी सांसद किसी अन्य दल में तब तक शामिल नहीं हो सकते जब तक कि कानूनी प्रक्रिया पूरी न हो।
सम्बंधित ख़बरें
औद्योगिक विकास की नई रूपरेखा तैयार करेगा CMIA, ‘नीति से निर्मिति’ के मंत्र के साथ नई टीम का ऐलान
महाराष्ट्र की जेलों में बदलाव की बयार! CM फडणवीस और TISS की पहल से मुख्यधारा में लौट रहे कैदी
विलास घुले मर्डर केस में बड़ा मोड़: सांसद के बेटे पर आरोप, सौरभ सोनवणे ने वीडियो जारी कर दी सफाई
मुंबई का सेवेन हिल्स हॉस्पिटल बनेगा 1500 बेड का महा-मेडिकल हब, कैंसर और ट्रांसप्लांट पर होगा विशेष फोकस
‘ऑपरेशन टाइगर’ और टूटते सांसदों का गणित
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा जोरों पर है, जिसके तहत दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। इन बागी सांसदों में नाम शामिल हैं-
- नागेश आष्टीकर
- संजय देशमुख
- संजय जाधव
- संजय दीना पाटिल
- ओमप्रकाश राजे निंबालकर
- भाऊसाहेब वाकचौरे
वर्तमान में उद्धव ठाकरे के साथ केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाझे ही मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। सांसदों की इस बड़ी संख्या में कमी के कारण दिल्ली में उद्धव ठाकरे की ताकत घटती नजर आ रही है और संसद भवन स्थित उनके कार्यालय के भी हाथ से जाने की संभावना जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र विधान परिषद: मानसून सत्र में टला उपसभापति का चुनाव, नीलम गोरहे की कुर्सी पर मंडरा रहा है खतरा?
लोकसभा अध्यक्ष का आश्वासन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अरविंद सावंत और उनकी टीम ने मांग की है कि बागी सांसदों के लिए सदन में अलग बैठने की व्यवस्था न की जाए और न ही उन्हें किसी अलग गुट के रूप में मान्यता दी जाए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें आश्वस्त किया है कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह पूरी तरह से नियमों और संवैधानिक ढांचे के भीतर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय को कोई भी आवेदन मिलने पर उसकी गहन जांच की जाएगी और उसके बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।
यह राजनीतिक उठापटक ऐसे समय में हो रही है जब चुनाव आयोग पहले ही फरवरी 2023 में एकनाथ शिंदे के गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दे चुका है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली की इस कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में ‘संविधान’ की जीत होती है या ‘संख्या बल’ की।
