Tajinder Singh Tiwana Salary Donation Mayor Fund (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Tajinder Singh Tiwana Salary Donation Mayor Fund: मुंबई की राजनीति में जनसेवा की एक नई मिसाल पेश करते हुए, बीजेपी के युवा नेता और वार्ड नंबर 47 (मलाड) के पार्षद तेजिंदर सिंह तिवाना ने एक बड़ा और साहसिक निर्णय लिया है। तिवाना ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) से मिलने वाले अपने पूरे कार्यकाल के वेतन (मानदेय) और भत्तों को न लेने का फैसला किया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि यह पूरी राशि महापौर निधि (Mayor’s Fund) में जमा करा दी जाए, ताकि इसका उपयोग जनहित के कार्यों में हो सके।
तिवाना का यह कदम न केवल उनकी निस्वार्थ सेवा भावना को दर्शाता है, बल्कि अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक प्रेरणा बन गया है।
तेजिंदर सिंह तिवाना ने मुंबई की महापौर रितु तावड़े को एक पत्र सौंपकर अपने इस निर्णय की जानकारी दी। वर्तमान में बीएमसी के एक पार्षद को प्रतिमाह लगभग 25,000 से 30,000 रुपये का मानदेय मिलता है। इसके अलावा, समितियों और महासभा की बैठकों में शामिल होने के लिए अलग से भत्ता दिया जाता है। तिवाना ने स्पष्ट किया कि वह बिना किसी आर्थिक लाभ के शहर की सेवा करेंगे। उन्होंने कहा, “नगरसेवक का अर्थ ही है नगर की सेवा करना, और सेवा हमेशा निस्वार्थ होनी चाहिए। मेरा लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाना है।”
1 सितंबर 1985 को जन्मे तेजिंदर सिंह तिवाना मुंबई बीजेपी के सबसे सक्रिय और लोकप्रिय युवा चेहरों में से एक हैं। समर्थकों के बीच ‘तेजु’ नाम से मशहूर तिवाना वर्तमान में मुंबई बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं।
ऐतिहासिक जीत: तिवाना ने वार्ड 47 (मलाड) से विपक्षी उम्मीदवार को 13,858 वोटों के भारी अंतर से हराकर शानदार जीत दर्ज की थी।
अन्नामलाई का समर्थन: उनके चुनाव प्रचार के दौरान तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और फायरब्रांड नेता के. अन्नामलाई ने भी शिरकत की थी, जिससे उनकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और बढ़ी।
प्रशासनिक भूमिका: वह बीएमसी की महत्वपूर्ण स्थायी और विधि समिति के सदस्य भी हैं, जहाँ वे स्थानीय नागरिक समस्याओं को मजबूती से उठाते हैं।
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बीएमसी चुनावों के बाद बीजेपी के 89 पार्षद जीतकर आए थे, जिनमें से एक महिला पार्षद के निधन के बाद अब यह संख्या 88 है। बीजेपी वर्तमान में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ मिलकर बीएमसी में बहुमत में है। तिवाना के इस फैसले की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का मानना है कि यदि अधिक जनप्रतिनिधि इस तरह के कदम उठाएं, तो सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग हो पाएगा।