

Sharad Pawar Supriya Sule PM Modi Meeting: देश की संसद के मॉनसून सत्र के बीच महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के शीर्ष नेता महज 20 दिनों के भीतर दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने जा रहे हैं। इससे पहले 22 जुलाई को शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी।
अब 10 अगस्त को सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी नेताओं की प्रधानमंत्री से अहम बैठक तय हुई है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) और परिसीमन (Delimitation) जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश करने की तैयारी में है।
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने प्रस्तावित FCRA विधेयक के मौजूदा मसौदे को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी की मांग है कि इस विधेयक को तुरंत वापस लिया जाए और गहन समीक्षा के लिए संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेजा जाए।
वहीं, परिसीमन विधेयक के संदर्भ में कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया है कि यदि सभी राज्यों में आनुपातिक रूप से 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाती हैं, तभी उनकी पार्टी इसका समर्थन करने पर विचार करेगी। हालांकि, सुले ने यह भी साफ किया है कि 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के घटक दलों के साथ आम सहमति बनाए बिना पार्टी स्वतंत्र रूप से कोई अंतिम निर्णय नहीं लेगी।
बीते कुछ हफ्तों से राजनीतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज है कि शरद पवार की पार्टी महाविकास अघाड़ी (MVA) का साथ छोड़कर एनडीए/महायुति का हिस्सा बन सकती है। हालांकि, पार्टी ने इन दावों को हमेशा खारिज किया है।
इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एमवीए में किसी भी फूट से इनकार किया। संजय राउत ने कहा, "हमें पूरा विश्वास है कि एनसीपी-एसपी कभी एनडीए में शामिल नहीं होगी। जब प्रधानमंत्री संसद सत्र के दौरान सदन में उपस्थित नहीं होते हैं, तो विपक्षी दलों के नेताओं को जनहित और राज्य के जरूरी मुद्दों को उठाने के लिए उनसे उनके कार्यालय में मुलाकात करनी ही पड़ती है।"
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सुप्रिया सुले इस बैठक में परिसीमन और FCRA के अलावा महाराष्ट्र के किसानों की समस्याओं, अतिवृष्टि से हुए नुकसान और राज्य की लंबित विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करेंगी।
लगातार हो रही इन उच्चस्तरीय मुलाकातों के बाद राजनीतिक विश्लेषक आगामी महाराष्ट्र विधानसभा व स्थानीय निकाय चुनावों से पहले इन घटनाक्रमों को बेहद अहम मान रहे हैं।