
प्रियंका चतुर्वेदी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Priyanka Chaturvedi On UGC Rules: यूजीसी (UGC) के विवादित नए नियमों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को “अस्पष्ट” और “मनमाना” बताते हुए फिलहाल इन पर रोक लगा दी है। इस फैसले का स्वागत करते हुए शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने खुलासा किया कि कैसे इस मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपमानित किया गया।
उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इन रेगुलेशन पर रोक लगाते हुए आदेश दिया कि मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया है कि सुनवाई की अगली तारीख तक 2012 के पुराने यूजीसी रेगुलेशन ही प्रभावी रहेंगे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि नए नियमों का सेक्शन 3C असंवैधानिक है क्योंकि इसमें भेदभाव की दी गई परिभाषा संविधान के अनुरूप नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर खुशी जताते हुए उद्धव गुट की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि जब उन्होंने इन नियमों के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया गया। चतुर्वेदी ने बताया कि उन्हें न केवल गालियां दी गईं, बल्कि उनके सरनेम (Surname) को लेकर भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जो बात प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है, वह उसके खिलाफ निरंतर आवाज उठाती रहेंगी।
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सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर अपनी जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह अब “दिन के उजाले की तरह साफ” हो चुका है कि भारत सरकार ने हस्तक्षेप करने और विवादित दिशानिर्देशों को वापस लेने की अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया है। उनके अनुसार, सरकार को जनता के विरोध का कोई सम्मान या परवाह नहीं है। उन्होंने उन लोगों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जिनकी जिम्मेदारी आवाज उठाना थी, यह कहते हुए कि समय ही उनके आचरण का फैसला करेगा।
विवाद की मुख्य जड़ यूजीसी के नए इक्विटी रेगुलेशन थे, जिन्हें प्रियंका चतुर्वेदी ने “भेदभाव पैदा करने वाला” बताया था। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि इन नियमों के जरिए कैंपस में अधिक अस्पष्टता और मनमानापन बढ़ सकता था। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है, तो विश्वविद्यालयों में पुराने नियम ही लागू रहेंगे। इस फैसले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सच्चा न्याय” करार दिया है।






