NCP Ajit Pawar Faction Crisis (सोर्सः सोशल मीडिया)
NCP Ajit Pawar Faction Crisis: राकांपा (अजीत पवार) के भीतर चल रहा अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ गया है। चुनाव आयोग को भेजा गया पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार का पत्र न सिर्फ उनके लिए बल्कि उनके परिवार के लिए गले की हड्डी बन गया है। 10 मार्च को भेजे गए इस पत्र में सुनेत्रा ने आयोग से अनुरोध किया था कि अजीत पवार के निधन (28 जनवरी) से लेकर 10 मार्च तक पार्टी की ओर से किए गए किसी भी पत्राचार को वैध न माना जाए।
सूत्रों का दावा है कि अपने उक्त पत्र के कारण सुनेत्रा के अध्यक्ष पद के साथ-साथ पार्थ की राज्यसभा की सदस्यता भी कानूनी पेंच में फंस गई है। इस सियासी पेंच से छुटकारा पाने के लिए अब सुनेत्रा पत्र वापस लेने का दांव अपना सकती है। शरद पवार की राकां के विधायक रोहित पवार ने प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पर बेहद गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी।
रोहित पवार का दावा है कि अजीत की विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद पटेल और तटकरे ने पार्टी पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। पटेल और तटकरे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पार्टी संविधान में संशोधन करने और सभी शक्तियां अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी। रोहित के अनुसार, तटकरे और पटेल की साजिश की भनक लगने पर सुनेत्रा ने आयोग को पत्र लिख पार्टी पर ‘कब्जा’ करने कोशिश को नाकाम कर दिया था, लेकिन रोहित के दावे के विपरीत अब सुनेत्रा खुद ही सियासी दांव में फंस गई हैं। सुनेत्रा के पत्र के कारण अनजाने में एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है।
यदि 28 जनवरी के बाद का पत्राचार रद्द होता है, तो प्रफुल्ल पटेल द्वारा 16 फरवरी को आयोग को भेजी गई सुनेत्रा पवार की स्वयं की नियुक्ति और पार्थ पवार की राज्यसभा उम्मीदवारी संबंधी दस्तावेज भी अवैध हो जाएंगे। पार्थ पवार के ‘एबी फॉर्म’ पर पटेल और तटकरे के ही हस्ताक्षर हैं। ऐसे में यदि पत्र वापस नहीं लिया गया, तो पार्थ की सांसदी और सुनेत्रा का अध्यक्ष पद दोनों कानूनी रूप से शून्य हो सकते हैं।
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माना जा रहा है कि सुनेत्रा पवार ने यह पत्र वरिष्ठ नेताओं से सलाह किए बिना पार्थ पवार के कहने पर भेजा था, जिससे प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे दिग्गज नेता शांत और नाराज हैं। पार्टी के कानूनी सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे मामलों में भी आत्मघाती सिद्ध हो सकता है।
इन्हीं खतरों को भांपते हुए अब सुनेत्रा पवार इस विवादित पत्र को निरस्त करने के लिए चुनाव आयोग को नया आवेदन भेजने की तैयारी में हैं, ताकि पार्टी और परिवार के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। खुद पार्थ पवार अपने बयानों से पटेल और तटकरे को खुश करने का प्रयास करते दिख रहे हैं।