Sunetra Pawar ECI Letter (फोटो क्रेडिट-X)
Sunetra Pawar ECI Letter: पुणे और महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर बड़े शक्ति संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक पत्र (Letter) ने महायुति गठबंधन और एनसीपी के भीतर खलबली मचा दी है। यह पत्र एनसीपी की नई अध्यक्ष सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) द्वारा भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को भेजा गया है, जिसमें पार्टी के दो सबसे कद्दावर नेताओं, कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के पदों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। 10 मार्च को लिखे गए इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या सुनेत्रा पवार अपनी ‘दब्बू’ छवि को तोड़कर पार्टी पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।
अजित पवार के असामयिक निधन के बाद 26 फरवरी को सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से पार्टी प्रमुख चुना गया था, लेकिन इस नए घटनाक्रम ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच के अंदरूनी तनाव को सतह पर ला दिया है।
सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) ने ईसीआई को 14 पदाधिकारियों की एक सूची भेजी है, जिसमें स्वयं को ‘पार्टी अध्यक्ष’ और शिवाजीराव गर्जे को ‘कोषाध्यक्ष’ बताया गया है। हालांकि, शेष 12 सदस्यों की सूची में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल और यहाँ तक कि उनके बेटे जय पवार के नाम तो शामिल हैं, लेकिन उनके आधिकारिक पदों का कहीं कोई जिक्र नहीं है। पत्र में एक सख्त निर्देश भी दिया गया है कि 28 जनवरी से 26 फरवरी (अजित पवार के निधन और उनकी नियुक्ति के बीच का समय) के दौरान पार्टी की ओर से भेजे गए किसी भी संदेश या सूचना पर विचार न किया जाए। राजनीतिक विश्लेषक इसे उन फैसलों को पलटने की कोशिश मान रहे हैं जो शायद उनकी अनुपस्थिति में लिए गए थे।
ये भी पढ़ें- मुंबई के घाटकोपर में डिलीवरी बॉय की ठगी, 1.3 लाख के दो आईफोन लेकर फरार
सुनेत्रा पवार की यह कार्रवाई उनकी ‘दब्बू’ छवि को हटाकर पार्टी पर पूर्ण नियंत्रण पाने की कोशिश मानी जा रही है।
उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने के बाद से सुनेत्रा पवार काफी ‘लो-प्रोफाइल’ रही हैं। उन्होंने न तो कोई बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की और न ही नरहरि झिरवाल के वीडियो विवाद या रूपाली चाकणकर से जुड़े मामलों पर कोई टिप्पणी की। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर यह धारणा बन रही थी कि संगठन के असल फैसले प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ही ले रहे हैं। सीनियर नेताओं का मानना था कि सुनेत्रा को लोगों से सीधे जुड़ने में पहल करनी चाहिए। ऐसे में चुनाव आयोग को भेजा गया यह ‘बिना पद वाला पत्र’ उनकी छवि को एक ‘मजबूत नेता’ के रूप में स्थापित करने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस विवाद के बीच प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने एक मराठी चैनल को दिए साक्षात्कार में अपनी चुप्पी तोड़ी है। महीनों तक एनसीपी के दोनों गुटों (अजित और शरद पवार गुट) के एक होने की खबरों को खारिज करने के बाद, तटकरे ने पहली बार स्वीकार किया कि जब अजित पवार जीवित थे, तब विलय पर गंभीरता से चर्चा चल रही थी। तटकरे ने कहा, “मुझे विलय की बातचीत की जानकारी थी और मैं इसके खिलाफ नहीं था।” हालांकि, उन्होंने शरद पवार गुट की आलोचना करते हुए कहा कि अजित दादा के निधन के तुरंत बाद विलय की बात करना संवेदनहीनता थी।
सुनील तटकरे के इस कबूलनामे पर शशिकांत शिंदे ने पलटवार करते हुए कहा कि वे लंबे समय से कह रहे थे कि विलय की बात अंतिम चरण में थी, लेकिन तब एनसीपी नेता इससे इनकार कर रहे थे। उन्होंने मांग की कि तटकरे को अब अपनी पार्टी के भीतर हुई गुप्त चर्चाओं का भी खुलासा करना चाहिए। इस बीच, सुनेत्रा पवार बुधवार शाम दिल्ली पहुँची हैं, जहाँ उनके एनडीए (NDA) के शीर्ष नेतृत्व से मिलने की संभावना है। माना जा रहा है कि दिल्ली दौरे के दौरान वे पार्टी के भीतर अपनी स्वायत्तता और आगामी उपचुनावों की रणनीति पर चर्चा करेंगी।