

Ram Kadam Vs Pawan Khera: भारतीय राजनीति के गलियारों में इस समय एक नई हलचल मच गई है, और इसका केंद्र बिंदु कोई चुनावी रैली या नीतिगत फैसला नहीं, बल्कि एक किताब है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा, बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव, आगामी 10 नवंबर को लॉन्च होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस किताब के आने की घोषणा ने ही देश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है और पक्ष-विपक्ष के बीच बयानों की गरमागरम जंग छिड़ गई है।
मुंबई में भाजपा के विधायक राम कदम ने मीडिया के सामने सोनिया गांधी की इस आने वाली आत्मकथा को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई। उन्होंने सोनिया गांधी को उनकी किताब के लिए शुभकामनाएं तो दीं, लेकिन शुभकामनाओं के पीछे एक तीखा कटाक्ष और राजनीतिक हमला भी छिपा हुआ था।
राम कदम ने कहा कि वह दिल से सोनिया गांधी को उनकी आने वाली आत्मकथा के लिए बधाई देते हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कुछ तीखे सवाल और राजनीतिक उम्मीदें भी सामने रख दीं।
राम कदम ने पूर्ववर्ती कार्यकाल को याद दिलाते हुए कटाक्ष किया कि उन्हें उम्मीद है कि सोनिया गांधी ने अपनी इस किताब में उस सच को पूरी ईमानदारी से लिखा होगा कि उनके कार्यकाल के दौरान देश के प्रधानमंत्री किस तरह एक कठपुतली के समान काम करते थे, जिनका रिमोट कंट्रोल सीधे 10 जनपथ से चलाया जाता था।
उन्होंने यह भी मांग की कि सोनिया गांधी को अपनी इस किताब में उस कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार का भी खुलकर जिक्र करना चाहिए। भाजपा विधायक ने आगे गंभीर आरोप लगाया कि कैसे उस दौर में लोगों की सेवा करने के बजाय केवल अपनी खुद की व्यक्तिगत तिजोरी भरने की लगातार कोशिशें की जा रही थीं।
राम कदम का कहना था कि अच्छी और सुंदर बातें तो हर कोई अपनी किताब में लिखता है, लेकिन अगर सोनिया गांधी ने इस पुस्तक में वास्तविकता और सच्चाई को दर्ज किया होगा, तो उनके इस सच का स्वागत जरूर किया जाएगा।
भाजपा की इस तीखी प्रतिक्रिया के समानांतर, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोनिया गांधी की इस आत्मकथा का बेहद गर्मजोशी और भावुकता से स्वागत किया। पवन खेड़ा ने भाजपा के राजनीतिक आरोपों से हटकर इस किताब को एक गहरा मानवीय और व्यक्तिगत आयाम दिया।
उन्होंने कहा कि न केवल पूरा देश बल्कि दुनिया भर के अनगिनत लोग बेहद बेसब्री से इस किताब के आने का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव को सिर्फ एक साधारण किताब के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए; यह वास्तव में एक सफर है, उनके जीवन का एक यात्रा-वृत्तांत है। खेड़ा ने बेहद भावुक होकर कहा कि यह एक ऐसा सफर रहा है जिसमें सोनिया गांधी ने जीवन के अत्यंत कठिन दौर को सहा है।
उन्होंने सोनिया गांधी के जीवन की त्रासदी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार के दो सदस्यों की शहादत के गहरे दर्द को सहन किया है, जिसमें उनके पति राजीव गांधी की शहादत भी शामिल है।
इस पूरे मामले में छिड़ी राजनीतिक जंग के बीच जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जो कि काफी संतुलित रही।
उन्होंने सोनिया गांधी को उनकी आत्मकथा के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। राजीव रंजन ने कहा कि सोनिया गांधी ने इस पुस्तक में अपने जीवन से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र किया है।
जैसे-जैसे 10 नवंबर की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक हलकों में इस पुस्तक को लेकर उत्सुकता और चर्चाएं और तीव्र होती जा रही हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जब बिलॉन्गिंग बाजार में आएगी, तो वह राजनीतिक बहसों की दिशा को किस ओर मोड़ती है।