कौड़ियों के दाम बिका प्याज, 73 बोरी बेचने के बाद किसान को मिले महज 400 रुपए

Onion Prices: सोलापुर के किसान अंकुश गुंजाल को 73 बोरी प्याज बेचने के बाद महज 400 रुपए मिले, जिससे किसानों की दयनीय स्थिति उजागर हुई; न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने और किसानों की मदद करने की मांग उठी।
solapur onion farmer loss 2026
Solapur Farmer (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Farmer Financial Crisis: भारत जैसे कृषि प्रधान देश में प्याज के कारण अन्नदाता किसान एक बार फिर खून के आंसू रोने को मजबूर हुआ। ऐसी हृदय विदारक घटना महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से सामने आई है, यहां एक किसान को अपनी मेहनत का मोल महज 50 पैसे प्रति किलो के हिसाब से मिला है। भारी मशक्कत के बाद उगाई गई प्याज की फसल को जब बाजार में लाया गया, तो उसकी कीमत मिट्टी के बराबर आंकी गई। लगभग 20 दिन बाद इस घटना की जानकारी वायरल हुई है और अब लोग कृषि व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

करमाला तहसील के पांगरे गांव के निवासी किसान अंकुश अन्ना गुंजाल ने अपने खेत में खून-पसीना एक कर प्याज की फसल तैयार की थी। 21 अप्रैल 2026 को वे अपनी उम्मीदों से भरी 73 बोरी प्याज लेकर सोलापुर की 'शरीफ ट्रेडर्स' मंडी पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि फसल की बिक्री से कुछ मुनाफा होगा, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी होंगी। लेकिन बाजार में प्याज की भारी आवक होने के कारण व्यापारियों ने उनके प्याज की कीमत केवल 50 पैसे प्रति किलो लगाई।

खर्च के बोझ ने तोड़ी कमर

जब अंकुश को प्याज की बिक्री की रसीद मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। 73 बोरियों की कुल बिक्री कीमत 5,068 रुपए तय की गई थी। लेकिन जब इसमें से खर्चे घटाए गए, तो हकीकत और भी भयावह निकली। परिवहन किराया, हमाली (मजदूरी), तोलाई और कमीशन जैसे अनिवार्य खर्चों को काटने के बाद अंकुश के हाथ में मात्र 400 रुपए बचे। चिलचिलाती धूप में काम करने और हजारों रुपए की लागत लगाने के बाद मिले इस नाममात्र के पैसे ने किसान को गहरे सदमे में डाल दिया है।

बढ़ता आक्रोश और मांग

इस घटना के बाद करमाला क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि रात-दिन मेहनत करने के बाद भी यदि फसल माटी के मोल बिकेगी, तो खेती करना असंभव हो जाएगा। स्थानीय लोगों और किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि प्रत्येक फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को सख्ती से लागू किया जाए और पीड़ित किसान को विशेष सहायता प्रदान की जाए, ताकि देश का पेट भरने वाला खुद कर्ज और भूख की भेंट न चढ़ जाए।

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