Mumbai: शिवाजी पार्क में बढ़ता वायु प्रदूषण, बीएमसी व IIT बॉम्बे ने की समाधान पर चर्चा
मुंबई के शिवाजी पार्क में बढ़ते वायु प्रदूषण पर बीएमसी, IIT बॉम्बे विशेषज्ञ और स्थानीय निवासियों ने बैठक कर समस्या और समाधान के उपायों पर चर्चा की। इस मामले पर Bombay High Court ने BMC को फटकार लगायी।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई का शिवाजी पार्क (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: शिवाजी पार्क में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर बनती जा रही है, ऐसे में वहां रहने वाले रहवासी लंबे समय से बीएमसी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द किया जाए।
इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी बीएमसी को फटकार लगाई है। रविवार को वायु प्रदूषण के विषय पर चर्चा को लेकर शिवाजी पार्क में सुबह 11 बजे एक बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में बीएमसी के जी उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त विनायक विस्पुते, आईआईटी बॉम्बे के पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर वीरेंद्र सेठी और वहां के रहवासी मौजूद थे। देर तक चली इस बैठक में सभी हितधारकों की बातें सुनी गई।
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बैठक में सभी हितधारकों ने रखा अपना पक्ष
सहायक आयुक्त विनायक विस्पुते ने ‘नवभारत’ को बताया कि बैठक में हुई चर्चा सकारात्मक रही और सभी लोगों ने अपना पक्ष रखा। कई लोगों ने अपनी आपत्तिया और सुझाव प्रकट किए, जिससे इस समस्या को और गहराई से समझने का मौका मिला।
इस दौरान पूरे पार्क का मुआयना किया गया और आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञ वीरेंद्र सेठी ने परिस्थिति को समझने की कोशिश की, सभी हितधारकों द्वारा दिए गए सुझाव पर विचार किया जाएगा और बाद में निष्कर्ष निकाला आएगा। उन्होंने आगे बताया कि आईआईटी बॉम्बे सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद बीएमसी को सुझाव प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए आगे का कदम उठाया जाएगा।
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खराब रखरखाव के लगाए आरोप
- पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर हाल के महीनों में, मैदान पूरी तरह से उपेक्षा की स्थिति में रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि खराब रखरखाव, अत्यधिक राजनीतिक उपयोग और असफल सौंदर्गीकरण परियोजना ने इसके तेजी से बिगड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है।
- कई लोगों का मानना है कि असली मोड तब आया, जब मैदान पर लगभग डेढ़ फुट मोटी लाल मिट्टी की परत बिछाई गई, जिसे ‘सौदीकरण’ के नाम पर किया गया था। छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क रेसिडेंट्स एडवांस्ड लोकैलिटी मैनेजमेंट (एएलएम) के सदस्य वैभव रेगे ने कहा कि यह बुरी तरह असफल रहा, “”यह लाल मिट्टी अब स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गई है। रैलियों या तेज हवा के दिनों में मिट्टी के महीन कण हवा में फैल जाते हैं, जिससे निवासियों को सांस संबंधी बीमारियां होने लगी हैं।
- एक अन्य निवासी ने कहा, “कार्यक्रमों की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो जाती है, जिससे मैदान आम लोगों के लिए बंद हो जाता है, और कार्यक्रम के बाद सफाई में भी उतना ही समय लगता है।
