शादी-जश्न में कटौती क्यों करें? CM फडणवीस की सूखा राहत वाली अपील पर भड़की उद्धव की शिवसेना यूबीटी

Shiv Sena UBT On Devendra Fadnavis Appeal: महाराष्ट्र में सूखे के संकट के बीच सीएम फडणवीस की दान अपील पर शिवसेना (UBT) ने पलटवार किया है। इसे असंवेदनशील बताते हुए भ्रष्टाचार रोकने की मांग की है।
Uddhav Thackeray Shiv Sena UBT On Devendra Fadnavis Appeal
उद्धव ठाकरे व देवेंद्र फडणवीससोर्स: सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Shiv Sena UBT On Maharashtra Drought Relief Fund: महाराष्ट्र में सूखे की मार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा नागरिकों से अपने निजी जश्न कम करने और बचत का पैसा सूखा राहत कोष में दान करने के आग्रह पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने कड़ा एतराज जताया है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के ताजा संपादकीय में राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और मंशा पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

शिवसेना (UBT) ने महाराष्ट्र सरकार के इस कदम को आम जनता की 'खाली जेबों से पैसे निकालने' की कोशिश करार दिया। संपादकीय में कहा गया है कि महंगाई और आर्थिक तंगी से पहले से ही जूझ रही जनता से आपदा प्रबंधन के लिए फंड मांगना पूरी तरह से असंवेदनशील कदम है।

महाराष्ट्र में दो दिन में 4 किसानों ने की आत्महत्या

संपादकीय में पूरे महाराष्ट्र में बढ़ते कृषि संकट की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया गया कि गंभीर सूखे के कारण कर्ज और मुश्किलों से जूझ रहे परभणी, यवतमाल, सोलापुर और हिंगोली जिलों में सिर्फ दो दिनों के भीतर चार किसानों ने आत्महत्या कर ली। अगर राज्य सरकार से तुरंत और सीधी मदद नहीं मिली, तो सूखा प्रभावित इलाके 'कब्रिस्तान' में बदल सकते हैं, ऐसी चेतावनी भी दी गई। इन समुदायों को बचाए रखने की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और उनके प्रशासन पर होगी।

शादी-ब्याह में कटौती के बजाय भ्रष्टाचार पर लगाएं लगाम

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे चुनौती देते हुए उद्धव ठाकरे गुट ने कहा कि जो आम नागरिक पहले से ही महंगाई और आर्थिक तनाव से जूझ रहे हैं, उनसे शादी और नामकरण जैसे छोटे पारिवारिक समारोहों में कटौती करने के बजाय, सरकार को आंतरिक भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और ठेकेदारों के कमीशन पर सख्ती करनी चाहिए।

सामना के संपादकीय में महाराष्ट्र की विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया। इसमें कोंकण क्षेत्र में तटीय जमीन की विवादास्पद बिक्री और शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे से जुड़े भारी फंड के लेन-देन का जिक्र किया गया।

उद्धव ठाकरे गुट ने दावा किया कि जनता का पैसा अक्सर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए दूसरी जगहों पर लगाया जाता है। मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा गया कि वे जनता से कंजूसी करने को कहने के बजाय, इस तरह की पैसे की बर्बादी को रोकें ताकि सूखा राहत के लिए फंड जुटाया जा सके।

Uddhav Thackeray Shiv Sena UBT On Devendra Fadnavis Appeal
रोहित पवार की फडणवीस सरकार को चेतावनी, 12 अक्टूबर तक किसानों को राहत नहीं मिली तो समृद्धि महामार्ग करेंगे जाम

उद्धव ठाकरे गुट का महाराष्ट्र सरकार पर हमला

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि "राज्य सरकार कमीशन-एजेंटों और ठेकेदारों की सरकार बन गई है। हर तरफ लूट मची है। ठेकेदारों को सरकारी खजाने का पैसा देने और अपनी जेबें भरने के लिए गैर-जरूरी परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। अगर मुख्यमंत्री इस लूट को भी रोक दें, तो इससे सूखा प्रभावित लोगों को फायदा होगा।"

राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और नेताओं की खरीद-फरोख्त के आरोपों पर निशाना साधते हुए, संपादकीय में सत्ताधारी गठबंधन से कहा गया है कि वे राजनीतिक खर्चों को ग्रामीण इलाकों की मुश्किलों को दूर करने में लगाएं। इसमें सुझाव दिया गया है कि राजनीतिक दल-बदल और चुनाव प्रचार के लिए रखे गए फंड को तुरंत प्रभावित किसानों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाए।

सूखे से निपटने के लिए फंड जुटाने की उपाय भी बताए

इसके अलावा, संपादकीय में सरकार के लिए सूखे से निपटने के लिए बड़ा फंड जुटाने के कई अहम उपाय सुझाए हैं। इसमें सरकार से कहा गया है कि वह राजनीतिक सहयोगियों के लिए तय बकाया रकम को सीधे सूखा राहत कोष में ट्रांसफर करे और मुंबई के बड़े बिल्डरों, स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के डेवलपर्स और मोटी कमाई करने वाले वरिष्ठ नौकरशाहों से बड़ा योगदान अनिवार्य करे।

Uddhav Thackeray Shiv Sena UBT On Devendra Fadnavis Appeal
केतन अग्रवाल मर्डर केस: सिया-चेतन का वरमाला वाला फोटो, टूटे फोन, ChatGPT सर्च और फर्जी अकाउंट से खुले कई राज

पीएम केयर्स फंड से मदद की मांग

संपादकीय में राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि वह महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र की मदद के लिए पीएम केयर फंड में बची हुई रकम में से 2,000 करोड़ रुपये से 4,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग करे।

आखिर में, सामना के संपादकीय में इस बात पर जोर दिया कि मंत्रियों द्वारा एक महीने की सरकारी सैलरी छोड़ना जैसे सांकेतिक दान सत्ताधारी नेताओं के पास मौजूद भारी संसाधनों को देखते हुए महज दिखावा है। पार्टी ने नेतृत्व से आग्रह किया कि वे भ्रष्ट अधिकारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक बिचौलियों की फल-फूल रही मिलीभगत को तोड़कर असली हिम्मत दिखाएं, ताकि राज्य के 11 करोड़ नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com