

Shiv Sena Supports Election Commission: चुनाव आयोग व मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जहां अन्य विपक्षी दलों के साथ उद्धव सेना और मनसे ने मोर्चा खोल दिया है,वहीं शिवसेना खुलकर आयोग के समर्थन में आ गई है। जारी सियासी घमासान के बीच शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और मुख्य चुनाव आयुक्त से 48 घंटे में इस्तीफा मांगना संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान है।
संजय निरुपम ने कहा कि चुनावी नतीजे पक्ष में नहीं आने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाना और ‘वोट चोरी’ का नैरेटिव खड़ा करना विपक्ष की राजनीति का हिस्सा बन गया है। उनके मुताबिक चुनावी हार की जिम्मेदारी संवैधानिक संस्थाओं पर डालने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता के जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर निरुपम ने कहा कि मतदाता सूची में मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहरे मतदाताओं की पहचान कर सूची को अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को सीधे ‘वोट चोरी’ से जोड़ना उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि किसी मतदाता के नाम को लेकर आपत्ति है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
महाराष्ट्र राज्य की मतदाता सूची को लेकर निरुपम ने बड़े आंकड़े सामने आने का दावा किया। उनके अनुसार करीब 76 लाख मतदाता अनुपस्थित, लगभग 75 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित, करीब 34 लाख मृत और लगभग 17 लाख नाम दोहरे मतदाताओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन नामों का नियमानुसार सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने के लिए जरूरी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोपों पर भी निरुपम ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी चुनावी हार के लिए किसी एक चुनाव आयुक्त या पूरी चुनाव प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों पर उन्होंने पूछा कि यदि किसी निर्णय पर असहमति थी तो क्या संबंधित बैठक में औपचारिक ‘नोट ऑफ डिसेंट’ दर्ज किया गया था।
शिवसेना को ‘शेल कंपनी’ या ‘प्रॉक्सी पार्टी’ बताए जाने पर भी निरुपम ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में विभाजन भारतीय राजनीति में नई बात नहीं है और 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के उम्मीदवारों का निर्वाचित होना पार्टी के राजनीतिक जनाधार का प्रमाण है।