

MNS Shiv Sena UBT Joint March October: महाराष्ट्र में चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने 4 अक्टूबर को संयुक्त मोर्चा निकालने का ऐलान किया है।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी। इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने राज ठाकरे से मुलाकात की थी।
राज ठाकरे के मुताबिक, प्रस्तावित मोर्चा केवल किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं होगा। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने वाला मंच बताया है।
ठाकरे ने अन्य राजनीतिक दलों से भी इसमें शामिल होने की अपील करने की बात कही है। राज ठाकरे पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं।
इस बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कुछ आपत्तियां ऐसे फैसलों से जुड़ी थीं, जिनके बारे में दोनों अधिकारियों ने कहा कि वे उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए थे। एक दिन में चार आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। इन दावों के संबंध में द इंडियन एक्सप्रेस ने चुनाव आयोग से प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक जवाब नहीं मिला था।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दिपके ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP 2 अक्टूबर से मुंबई में विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी और इसे देश के अन्य शहरों तक ले जाएगी।
अभिजीत दिपके ने CEC के इस्तीफे के अलावा उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। CJP ने चुनावों को लेकर मौजूदा प्रक्रिया पर रोक, 2024 की मतदाता सूची बहाल करने और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग भी उठाई है।
पार्टी ने चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की है। ये CJP की राजनीतिक मांगें हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है।
चुनाव आयोग के कामकाज, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों और अन्य समूहों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
वहीं चुनाव आयोग के निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने विवाद को और चर्चा में ला दिया है। ऐसे में 4 अक्टूबर को प्रस्तावित मनसे-शिवसेना (यूबीटी) मोर्चे और 2 अक्टूबर से प्रस्तावित CJP आंदोलन पर राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी।