‘एक हो जाएं उद्धव और शिंदे गुट’; अंबादास दानवे के बाद अब्दुल सत्तार ने भी सुर में सुर मिलाया, बीजेपी पर निशाना
Shiv Sena Both Factions Reunion Talk Abdul Sattar Ambadas Danve 2026: एनसीपी के बाद अब दोनों शिवसेना गुटों के विलय की चर्चा तेज। मंत्री अब्दुल सत्तार और अंबादास दानवे के बयानों से राजनीतिक हलचल।
- Written By: अनिल सिंह
क्या फिर एक होगी बालासाहेब की शिवसेना? महायुति में दरार के बीच दोनों गुटों के एक साथ आने के कयास (फोटो क्रेडिट-X)
Shiv Sena Both Factions Reunion: महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन और बिखराव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। छत्रपति संभाजीनगर-जालना विधान परिषद चुनाव के व्यस्त माहौल के बीच शिवसेना के दोनों धड़ों को एक मंच पर लाने की कोशिशों ने अचानक रफ्तार पकड़ ली है। हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि शिवसेना के दोनों गुटों को अपने आपसी मतभेद भुलाकर फिर से एक हो जाना चाहिए। दानवे के इस बयान पर राजनीतिक हलकों में कयासबाजी चल ही रही थी कि शिंदे गुट के कद्दावर नेता और राज्य सरकार में मंत्री अब्दुल सत्तार ने भी इस सुर में सुर मिलाकर सबको हैरान कर दिया।
अब्दुल सत्तार ने दानवे के रुख को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि वे खुद भी दिल से यही चाहते हैं कि दोनों शिवसेना पार्टियां एक साथ आएं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतिम निर्णय उनके शीर्ष नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ही लेना है। सत्तार ने कहा कि यदि शिंदे साहब पार्टी और राज्य के हित में दोनों गुटों के एकीकरण का कोई भी फैसला लेते हैं, तो पूरी पार्टी उनके पीछे खड़ी रहेगी।
सहयोगी दल भाजपा पर ही शिवसेना को कमजोर करने का संगीन आरोप
अब्दुल सत्तार ने इस दौरान महायुति के अपने ही प्रमुख सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रति अपनी तीखी नाराजगी खुलकर जाहिर की। सत्तार ने बेहद आक्रामक अंदाज में आरोप लगाया कि महागठबंधन में शामिल सहयोगी दल जमीनी स्तर पर शिवसेना की ताकत को कम करने और उसे सांगठनिक रूप से कमजोर करने की सुनियोजित साजिश रच रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय और जिला स्तर के राजनीतिक समीकरणों में जानबूझकर गुटबाजी की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि शिवसेना की साख को ठेस पहुंचाई जा सके।
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अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद बदली राज्य की राजनीतिक दिशा
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीति में यह हलचल ऐसे समय में हो रही है जब कुछ ही दिन पहले तक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों (अजित पवार और शरद पवार गुट) के बीच भी पर्दे के पीछे से विलय की बातें चल रही थीं। राजनीतिक गलियारों में इस संभावित विलय को लेकर कड़े कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन इसी बीच उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक और असमय निधन के बाद इस संवेदनशील विषय को फिलहाल के लिए पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। NCP के इस घटनाक्रम के बाद अब शिवसेना का यह नया मोड़ सामने आया है।
अब्दुल सत्तार और अंबादास दानवे के बयानों से महायुति में हड़कंप
छत्रपति संभाजीनगर और मराठवाड़ा की राजनीति के इन दो बड़े चेहरों, अब्दुल सत्तार और अंबादास दानवे के बयानों ने शिवसेना के भविष्य के राजनीतिक मार्ग को लेकर एक नई और लंबी बहस को हवा दे दी है। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से ठीक पहले यदि दोनों शिवसेना गुटों के बीच अंदरूनी संवाद की भी शुरुआत होती है, तो यह महायुति के भीतर सीटों के बंटवारे और चुनावी भविष्य को पूरी तरह से बदलकर रख देगा। फिलहाल, इस बयानबाजी के बाद भाजपा और विपक्ष दोनों ही फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
