विकास के दावों पर आंकड़ों की चोट, फंड नहीं मिला या खर्च नहीं किया? बागी सांसदों पर MPLADS रिपोर्ट से उठे सवाल

Maharashtra Sanjay Raut: उद्धव सेना से बगावत करने वाले शिंदे गुट के 6 सांसदों के फंड के दावों की पोल खुली। सरकारी पोर्टल के मुताबिक, करोड़ों का फंड होने के बावजूद क्षेत्रों में 75% काम अधूरे हैं।
MPLAD portal exposes Shinde faction MPs who blamed lack of funds for defection. Reports reveal they spent barely 1% to 26% of funds, leaving 75% of projects incomplete.
सांसद संजय राऊत (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Maharashtra MPLAD Fund Sanjay Raut: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से बगावत कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले छह सांसदों को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इन सांसदों ने दल-बदल करते वक्त आरोप लगाया था कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की 'सांसद निधि' वेबसाइट से मिले तीन साल के आंकड़ों ने इनके दावों की हवा निकाल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन छह बागी सांसदों ने आवंटित फंड में से सिर्फ 1.07% से लेकर 26.84% हिस्सा ही खर्च किया है।

100 करोड़ भी पड़ रहे सांसदों को कम

केंद्र सरकार की तरफ से 'सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना' के तहत स्थानीय जरूरतों और विकास कार्यों के लिए हर सांसद को प्रति वर्ष 5 करोड़ दिए जाते हैं। अगर यह फंड खर्च नहीं होता है, तो बची हुई रकम को अगले वित्त वर्ष में जोड़ दिया जाता है। एमपीलैड्स पोर्टल पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, इन छह बागी सांसदों के खाते में लगभग 100 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध था। लेकिन, पिछले दो वित्तीय वर्षों और इस साल की पहली तिमाही के दौरान इनमें से औसतन लगभग 13.60 करोड़ रुपये ही इस्तेमाल किए गए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद हिंगोली सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने कहा कि पोर्टल के आंकड़ों को गलत तरीके से समझा जा रहा है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि सांसद के रूप में हमें हर साल 5 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो 6 विधानसभाओं वाले एक लोकसभा क्षेत्र के लिए बहुत कम है। जब हमने पहले फंड की कमी की बात की थी, तो हमारा मतलब डीपीटीसी (जिला योजना और विकास समिति) और राज्य सरकार की योजनाओं से था।

यूबीटी सांसद संजय राऊत ने बोला तीखा हमला

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राऊत ने बागियों पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आंकड़े साफ दिखाते हैं कि ये सांसद एमपीलैड्स फंड का इस्तेमाल करने में किस तरह नाकाम रहे हैं। 14 करोड़ रुपये का फंड बिना खर्च हुए पड़ा है, आखिर उन्हें यह फंड खर्च करने से किसने रोका था और अब, वह किस फंड के लिए अपना पाला बदल रहे हैं?

75% फीसदी काम संसदीय क्षेत्र में अधूरे

  • बागी सांसदों द्वारा सुझाए गए, पूरे हुए और अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स की स्थिति कुछ इस प्रकार है।
  • नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली): छह सांसदों में इन्होंने सबसे ज्यादा 26.84% फंड खर्च किया है। अपने 107 प्रस्तावित विकास कार्यों में से इन्होंने सिर्फ 28 पूरे किए हैं, जबकि बाकी काम (जैसे सीमेंट रोड, कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल आदि) अभी जारी हैं।
  • संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट): इनका प्रदर्शन सबसे खराब रहा। इन्होंने महज 1.07% फंड का ही इस्तेमाल किया। मैदानों के सौंदर्याकरण और ड्रेनेज लाइन बिछाने जैसे इनके द्वारा सुझाए गए सभी 40 प्रोजेक्ट अब भी अधूरे है।
  • ओमराजे निंबालकर (धाराशिव): इन्होंने 130 काम प्रस्तावित किए थे, जिनमें से 21 पूरे हो चुके हैं और 109 पर काम चल रहा है।
  • संजय जाधव (परभणी): इनके 81 प्रस्तावित कार्यों में से 25 पूरे हुए हैं, जबकि 56 काम या तो पेंडिंग हैं या उन पर काम जारी है।
  • भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी): इन्होंने 137 प्रोजेक्ट्स की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक सिर्फ 2 ही पूरे हो सके है। 135 काम अभी भी अधूरे पड़े हैं।
  • संजय देशमुख (यवतमाल): इनके द्वारा सुझाए गए 113 कार्यों में से केवल 7 ही पूरे हुए हैं, जबकि 106 पर काम चल रहा है।
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