शरद पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sharad Pawar Warkari Statement Controversy: वारकरी संप्रदाय को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख और वरिष्ठ नेता शरद पवार के बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में घमासान मच गया है। पवार के ‘प्रतिगामी घुसपैठ’ और ‘60% लोगों द्वारा धर्मांध शक्तियों को बल’ संबंधी टिप्पणी पर शिवसेना (शिंदे गुट), भाजपा और वारकरी संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
दरअसल, महिला शासकीय अधिकारियों के पहले अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन की स्मारिका में शरद पवार ने लिखा कि वारकरी संप्रदाय जैसे समतावादी आंदोलन में प्रतिगामी विचारधारा के लोगों की घुसपैठ बढ़ रही है। उनका दावा है कि संप्रदाय के करीब 60 प्रतिशत लोग ऐसी भूमिका रखते हैं, जिससे कट्टर शक्तियों को मजबूती मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रबोधन के मार्ग पर महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है, जो चिंता का विषय है।
शरद पवार ने आगे बताया कि ऐसे लोगों की पहचान के लिए सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक लगभग 40 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो कीर्तन और प्रवचन के माध्यम से प्रगतिशील विचारों का प्रसार कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की भूमिका को अहम बताते हुए उनकी संख्या बढ़ाने की आवश्यकता जताई।
पवार के बयान पर सामाजिक न्याय मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वारकरी संप्रदाय में सभी जातियों के लोग शामिल होते हैं और इसे जातीय रंग देना हिंदू समाज को कमजोर करने का प्रयास है। शरद पवार को हिंदू समाज की ताकत को बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
अशोक खरात प्रकरण से जुड़ी एक शिकायत का जिक्र करते हुए शिरसाट ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को सतर्क रहने की सलाह दी। हालांकि उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के बयान पर शिरसाट ने कहा कि किसी भी आरोपी को उसके धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि उसके अपराध के आधार पर देखा जाना चाहिए। कोई भी बाबा हो, उसकी जाति या धर्म पर नहीं जाना चाहिए, उसे सिर्फ अपराधी के रूप में देखा जाना चाहिए।
भाजपा की अध्यात्मिक आघाड़ी के प्रमुख तुषार भोसले ने पवार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वारकरी संप्रदाय सामाजिक समता और भक्ति की परंपरा है, उसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पवार के बयान को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया।
यह भी पढ़ें:- गोंदिया-रक्सौल स्पेशल ट्रेन: गर्मियों की छुट्टियों में रेलवे का बड़ा तोहफा, जानें टाइम टेबल और रूट चार्ट
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने कहा कि वारकरी संप्रदाय का मूल उद्देश्य समाज का प्रबोधन है, न कि कट्टरता फैलाना। उन्होंने कहा कि अगर किसी तरह की घुसपैठ की बात है तो उसकी तथ्यात्मक जांच होनी चाहिए, लेकिन पूरे संप्रदाय पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
विश्व वारकरी सेना के हभप गणेश महाराज शेटे ने कहा कि वारकरी संप्रदाय ने हमेशा अंधविश्वास के खिलाफ और सामाजिक समता के लिए काम किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंदू धर्म पर किसी भी प्रकार का आघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, वारकरी साहित्य परिषद के अध्यक्ष विठ्ठल पाटिल ने पवार से कीर्तनकारों की कथित ‘सूची’ सार्वजनिक करने की मांग की।