नोरा फतेही के 'सरके चुनर' पर शाइना एनसी का प्रहार: 'बॉलीवुड को समझनी होगी अपनी जिम्मेदारी'

Nora Fatehi Sarke Chunar Controversy: शिवसेना नेता शाइना एनसी ने नोरा फतेही के गाने 'सरके चुनर' पर नाराजगी जताई। उन्होंने बॉलीवुड को अश्लीलता न परोसने और जिम्मेदारी निभाने की सलाह दी है।
Shaina NC On Nora Fatehi Sarke Chunar Controversy
Shaina NC On Nora Fatehi Sarke Chunar Controversy (फोटो क्रेडिट-X)
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Shaina NC On Sarke Chunar Controversy: बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही के हालिया गीत 'सरके चुनर' (Sarke Chunar) को लेकर छिड़ा विवाद अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। शिवसेना नेता शाइना एनसी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए फिल्म उद्योग को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी याद दिलाई है। शाइना एनसी का कहना है कि मनोरंजन के नाम पर परोसे जा रहे अश्लील कंटेंट पर नकेल कसना जरूरी है, क्योंकि इसका समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

मुंबई में मीडिया से बात करते हुए शाइना एनसी ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि नैतिक सीमाओं को लांघ दिया जाए। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और पोक्सो (POCSO) जैसे कड़े कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि जब सामग्री यौन रूप से आपत्तिजनक या अश्लील होती है, तो उसके पीछे की मंशा गलत होती है। इस विवाद के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की भूमिका और फिल्म सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी नई चर्चा शुरू हो गई है।

बॉलीवुड को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी: शाइना एनसी

शिवसेना नेता ने जोर देकर कहा कि बॉलीवुड को केवल व्यावसायिक लाभ के बारे में नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों के बारे में भी सोचना चाहिए। उन्होंने कहा, "चाहे वह भारतीय न्याय संहिता हो या आईटी एक्ट, राष्ट्रीय महिला आयोग की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि समाज में सही संदेश जाए।" शाइना एनसी के अनुसार, जब संगीत वीडियो या फिल्मों में अत्यधिक कामुक या अश्लील दृश्यों का उपयोग किया जाता है, तो वह समाज के ताने-बाने को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपील की है कि वे अपनी रचनात्मकता का उपयोग स्वस्थ मनोरंजन के लिए करें।

'सरके चुनर' गाने पर अश्लीलता के आरोप और विवाद

नोरा फतेही का नया गाना 'सरके चुनर' रिलीज होने के साथ ही विवादों के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया पर कई संगठनों और नागरिकों ने इस गाने के बोल और फिल्मांकन को 'अश्लील' और 'उत्तेजक' करार दिया है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इस तरह के 'आइटम नंबर' महिलाओं के वस्तुकरण को बढ़ावा देते हैं। शाइना एनसी ने इन चिंताओं का समर्थन करते हुए कहा कि जब मंशा केवल अश्लीलता परोसने की होती है, तो कानून को अपना काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय महिला आयोग को हस्तक्षेप कर कड़े दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता है।

कानूनों का दायरा और विधिक कार्रवाई की मांग

शाइना एनसी ने अपने बयान में कानूनी पहलुओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में आईटी एक्ट और बीएनएस के तहत सामग्री की निगरानी करना अनिवार्य है। विशेष रूप से जहां बच्चों या नाबालिगों की पहुंच इन वीडियो तक है, वहां पोक्सो एक्ट की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। शिवसेना नेता ने मांग की है कि ऐसे गीतों के खिलाफ न केवल सेंसरशिप बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए जो सार्वजनिक नैतिकता का उल्लंघन करते हैं। इस विवाद ने अब महाराष्ट्र में महिला सुरक्षा और सांस्कृतिक गरिमा के मुद्दे को एक बार फिर गरमा दिया है।

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