पीएम मोदी के साथ शिवसेना नेता शाइना एनसी (सोर्स: सोाशल मीडिया)
Shaina NC India EU FTA: भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और शैक्षिक सुधारों के बीच शिवसेना नेता शाइना एनसी ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को मील का पत्थर बताते हुए यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों का पुरजोर समर्थन किया, जो शिक्षण संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ का व्यापारिक बातचीत के लिए एक मंच पर आना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब दुनिया ‘मेक इन इंडिया’ की ताकत को पहचानेगी। शाइना के अनुसार, भारत को अब व्यापार के लिए केवल अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है; यूरोपीय संघ एक विशाल बाजार है जो भारतीय उत्पादों के लिए नए द्वार खोल सकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में होने वाली ये व्यापारिक वार्ताएं आने वाले समय में एक नया वैश्विक ट्रेंड स्थापित करेंगी। भारत की विनिर्माण (Manufacturing) क्षमता अब इतनी सुदृढ़ है कि वह दुनिया के किसी भी विकसित बाजार की मांगों को पूरा कर सकती है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नए नियमों पर हो रहे विवाद को शाइना एनसी ने अनावश्यक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए दिशा-निर्देश संस्थानों को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए हैं। अब संस्थानों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे शिकायतों का निपटारा तत्परता से करें और एक समावेशी माहौल तैयार करें।
इन नियमों की सबसे बड़ी विशेषता ‘इक्विटी कमेटियां’ हैं, जिनमें SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है। शाइना के मुताबिक, ये नियम विवाद के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को समान अवसर और न्याय दिलाने के लिए हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में जवाबदेही तय करते हुए शाइना एनसी ने 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करेगा। साथ ही, उन्होंने अवैध फंडिंग लेने वाले संस्थानों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अब उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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जाति आधारित भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने दावा किया कि भारतीय विश्वविद्यालयों में समानता का माहौल है। यदि कहीं कोई अनियमितता होती है, तो उसे रोकने के लिए सरकार के पास पर्याप्त तंत्र मौजूद है। उनके अनुसार, यूजीसी शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।