मुंबई के सेवन हिल्स अस्पताल को निजी कंपनी को सौंपने पर विवाद, कांग्रेस-शिवसेना ने मांगी जांच
Seven Hills Hospital News: सेवन हिल्स अस्पताल को निजी कंपनी केंप्री ग्लोबल को सौंपने के फैसले पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विपक्ष ने हजारों करोड़ की संपत्ति को कम कीमत में देने पर सवाल उठाए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
सेवन हिल्स हॉस्पिटल विवाद (सौ. सोशल मीडिया )
Seven Hills Hospital Deal News: बीएमसी के अंधेरी स्थित सेवन हिल्स अस्पताल को निजी कंपनी केंप्री ग्लोबल को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। मनपा प्रशासन के इस फैसले का विपक्ष ने तीव्र विरोध किया है और पूरे सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका जताई है।
कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के गुटनेता अशरफ आजमी ने आरोप लगाया कि यह सौदा मुंबईकरों के हितों के खिलाफ है। उनका कहना है कि अंधेरी स्थित सेवन हिल्स अस्पताल की करीब 60 एकड़ जमीन हवाई अड्डे के पास होने के कारण उसकी कीमत लगभग 5,000 से 7,000 करोड़ रुपये के बीच है।
उन्होंने बताया कि मूल समझौते के तहत यहां 1,500 बेड वाला अस्पताल संचालित किया जाना था और 20 प्रतिशत मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाना अनिवार्य था। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने न तो संपत्ति कर चुकाया और न ही लीज का किराया जमा किया। मुंबई मनपा द्वारा वर्ष 2018 में नोटिस जारी किए जाने के बाद मामला एनसीएलटी और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
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अशरफ आजमी ने लगाए गंभीर आरोप
आजमी ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद 12 दिसंबर, 2025 को केंप्री ग्लोबल के साथ नया समझौता किया गया और 15 दिसंबर को आचार संहिता लागू होने से पहले ही जल्दबाजी में एनओसी जारी कर दी गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि मनपा में नई निर्वाचित सत्ता के गठन का इंतजार किए बिना और 27 मई को सुधार समिति में प्रस्ताव आने से पहले ही निर्णय क्यों लिया गया। उनका कहना था कि कोविड काल में हजारों लोगों की जान बचाने वाले अस्पताल को किसी कॉर्पोरेट कंपनी के हवाले करना मुंबईकरों की स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर करने जैसा है।
3,000 करोड़ की संपत्ति को मात्र 223 करोड़ रुपये में बेचे
वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नगरसेवक प्रमोद सावंत ने भी इस सौदे पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि लगभग 15 लाख वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र और करीब 3,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को मात्र 223 करोड़ रुपये में निजी संस्था को सौपा जा रहा है।
सावंत के अनुसार, निविदा प्रक्रिया में केवल दो बोलीदाताओं को मौका दिया गया था, जिनमें से एक के पीछे हटने के बाद परियोजना एक ही कंपनी को मिल गई। उन्होंने केंप्री ग्लोबल और रिलायंस के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका भी व्यक्त की।
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सावंत ने कहा कि आचार संहिता लागू होने के एक दिन पहले मंजूरी दिए जाने से संदेह और गहरा हो गया है। उन्होंने मांग की कि तत्कालीन मनपा आयुक्त ने किसके दबाव में यह अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया, इसकी स्वतंत्र जांच कराई जाए। विपक्ष के तीखे रुख के चलते सेवन हिल्स अस्पताल का यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक विवाद का विषय बन सकता है।
