सातारा एसपी निलंबन विवाद पर फडणवीस की दो टूक, कहा- निलंबन का अधिकार केवल सरकार के पास
Devendra Fadnavis:सातारा एसपी निलंबन विवाद पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी को निलंबित करने का अधिकार केवल सरकार के पास है।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आंचल लोखंडे
Devendra Fadnavis statement (सोर्सः सोशल मीडिया)
Satara SP Suspension Controversy: सातारा जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव में पुलिस अधीक्षक की कथित संदिग्ध भूमिका को लेकर महायुति सरकार के भीतर ही मतभेद सामने आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी और शिवसेनाके बीच का यह विवाद अब विधान परिषद में संवैधानिक अधिकारों की बहस तक पहुंच गया है।
सोमवार को विधान परिषद की उपसभापति द्वारा सातारा के पुलिस अधीक्षक दोशी के निलंबन के निर्देश दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि “सभापति या उपसभापति का निर्देश ब्रह्मवाक्य नहीं होता। किसी अधिकारी के निलंबन का अधिकार केवल कार्यपालिका के पास है।”
सदन में अधिकारों को लेकर बहस तेज
मंगलवार को विधायक अनिल परब ने नियम 97 के तहत सवाल उठाया कि क्या सदन के पीठासीन अधिकारी किसी आईपीएस अधिकारी को निलंबित करने का आदेश दे सकते हैं। इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि उपसभापति के निर्देश महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन वे बाध्यकारी नहीं होते। अंतिम निर्णय तथ्यों की जांच के बाद सरकार ही लेती है।
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गौरतलब है कि विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे ने सातारा के पुलिस अधीक्षक के निलंबन के निर्देश दिए थे, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया। वहीं परिषद के सभापति राम शिंदे ने इस आदेश को फिलहाल सुरक्षित रख लिया है।
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अधिकारों को लेकर छिड़ी बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर विधायिका और कार्यपालिका के अधिकारों की सीमाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। सातारा जिला परिषद चुनाव में सत्ता के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य में इस तरह नियमों का उल्लंघन पहले कभी नहीं हुआ। शिवसेना के विधायक और मंत्री इस मुद्दे पर काफी आक्रामक रुख अपना रहे हैं और कुछ नेताओं ने इस्तीफे की चेतावनी भी दी है।
सातारा के एसपी के निलंबन को लेकर अब तक राज्य सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि मामले के सभी तथ्यों की जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
