संजय राउत व नरेंद्र मोदी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sanjay Raut On PM Narendra Modi: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और युद्ध की स्थितियों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक राहत की खबर सामने आई है। ईरान ने संघर्ष प्रभावित स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से भारतीय तेल टैंकरों और कंटेनरों को गुजरने की सुरक्षित अनुमति दे दी है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईरान के प्रति सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त करने की अपील की है।
संजय राउत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भले ही भारत आधिकारिक तौर पर इजरायल के साथ खड़ा है, लेकिन अगर ईरान इस कठिन समय में भारत के प्रति ‘मानवता’ और सहयोग दिखा रहा है, तो प्रधानमंत्री को इसे स्वीकार करना चाहिए। राउत ने जोर देकर कहा कि अगर ईरान ने हमारे कंटेनरों को गुजरने की अनुमति दी है, तो प्रधानमंत्री मोदी को सार्वजनिक रूप से ईरान का शुक्रिया अदा करना चाहिए। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में इस तरह के सहयोग को स्वीकार करना भारत के हित में है।
Mumbai, Maharashtra: On Iran granting permission to Indian tankers to transit through the Strait of Hormuz, Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut says, “If Iran has allowed our containers to pass, then Prime Minister Modi should thank Iran. Even though we stand with Israel, if Iran is… pic.twitter.com/ISyb1KUr4C — IANS (@ians_india) March 14, 2026
बता दें कि ईरान की ओर से यह राहत तब आई है जब भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने स्पष्ट किया कि तेहरान भारत जाने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करेगा। फथाली ने दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि ईरान भारत को एक ‘करीबी साझेदार’ मानता है। इस सहयोग का असर जमीन पर दिखने भी लगा है। हाल ही में, भारत के लिए तेल लेकर आ रहा एक विदेशी ध्वज वाला जहाज युद्धग्रस्त स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पार कर मुंबई पहुंच चुका है, जबकि एक अन्य बड़ा जहाज अगले एक-दो दिनों में भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने वाला है।
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भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है और अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत तेल विदेशों से मंगवाता है। भारत रोजाना लगभग 5.8 मिलियन बैरल तेल की खपत करता है, जिसमें से 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल तेल सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से इसी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते आता है। सिर्फ तेल ही नहीं, भारत की 55 प्रतिशत रसोई गैस (LPG) और 30 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) भी इसी संकरे समुद्री रास्ते से आती है।
वर्तमान संघर्ष के कारण इस रास्ते से होने वाली आवाजाही काफी हद तक रुक गई थी, जिससे भारत में ईंधन की आपूर्ति पर संकट मंडराने लगा था। ऐसे में ईरान का यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।