

Sanjay Raut on TVK Tamil Nadu Election: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है और कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद यह आंकड़ा 113 तक पहुँच गया है। इसके बावजूद, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर द्वारा विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न किए जाने पर संजय राउत ने दिल्ली से लेकर चेन्नई तक भाजपा की घेराबंदी की है।
संजय राउत ने महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के कार्यकाल का स्मरण कराते हुए कहा कि भाजपा ने देश के हर राजभवन में 'कोश्यारी' नियुक्त कर दिए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ये राज्यपाल केवल वेशभूषा में अलग हैं, कोई धोती पहनता है तो कोई सूट लेकिन इनका काम करने का अलोकतांत्रिक तरीका एक जैसा है। राउत के अनुसार, सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय थलपति को पहला मौका मिलना चाहिए, लेकिन भाजपा के इशारे पर राज्यपाल संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिली बड़ी जीत और ममता बनर्जी द्वारा इस्तीफा देने से इनकार करने पर राउत ने उनका बचाव किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का यह रुख दरअसल तानाशाही के खिलाफ एक संघर्ष है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता की 100 सीटें चुनावी धांधली के जरिए छीनी गई हैं। राउत ने आशंका जताई कि गृह मंत्री और राज्यपाल बंगाल में किसी भी हद तक जाकर संवैधानिक संकट पैदा कर सकते हैं, लेकिन 'इंडिया' गठबंधन उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
संजय राउत ने पंजाब के अमृतसर और जालंधर में हुए हालिया बम धमाकों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से जमीन तैयार कर रही है। राउत का आरोप है कि पंजाब जैसे शांतिपूर्ण राज्य में हिंसा और डर फैलाकर भाजपा वोट बटोरने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, जहां भी चुनाव होते हैं, भाजपा वहां संघर्ष और अस्थिरता का माहौल पैदा करती है।
संजय राउत ने अंत में कहा कि वर्तमान में देश में राज्यपालों के जरिए चुनी हुई सरकारों को परेशान करने का एक नया ट्रेंड चल पड़ा है। तमिलनाडु से लेकर बंगाल और पंजाब तक, विपक्ष शासित राज्यों में लोकतांत्रिक मूल्यों का गला घोंटा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनमत का इसी तरह अनादर होता रहा, तो देश में फासीवाद अपने पैर पसार लेगा, जिसके खिलाफ सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।