

Sanjay Raut on Modi And Fadnavis: शिवसेना (UBT) नेता और सांसद संजय राउत ने महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन में हो रही देरी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार पर जोरदार हमला बोला है। भाजपा द्वारा निकाले गए 'जन आक्रोश मोर्चे' पर सवाल उठाते हुए राउत ने कहा कि जब कानून पारित हो चुका है, तो इसे लागू करने के बजाय सड़कों पर मोर्चा निकालने का क्या तुक है? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को आरक्षण लागू करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप या व्लादिमीर पुतिन से अनुमति लेनी पड़ेगी?
संजय राउत ने 16 अप्रैल 2026 को जारी अध्यादेश का हवाला देते हुए कहा कि अब महिला आरक्षण आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है और सरकार को इसे तुरंत प्रभावी करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों में से किसी ने भी 33 प्रतिशत आरक्षण का विरोध नहीं किया है, बल्कि भाजपा खुद ही इसके क्रियान्वयन में रोड़े अटका रही है। राउत ने सवाल किया कि आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि सरकार इसे टाल रही है?
भाषण के दौरान संजय राउत ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की चर्चाओं पर कटाक्ष किया। उन्होंने विवादित ज्योतिषी अशोक खरात का नाम लेते हुए कहा, "क्या 850 सीटों का यह आंकड़ा खरात बाबा ने दिया है? वे बड़ी संख्याओं और अंकशास्त्र के विशेषज्ञ माने जाते हैं। शायद इसीलिए सरकार इस जादुई आंकड़े पर अड़ी हुई है।" राउत ने सुझाव दिया कि वर्तमान 543 सीटों पर ही आरक्षण लागू करना अधिक सुविधाजनक और संतुलित होगा, बजाय इसके कि सीटों के बढ़ने का इंतज़ार किया जाए।
संजय राउत ने भाजपा के जन आक्रोश मोर्चे को विश्व का 'अजूबा' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह दुनिया का पहला ऐसा जुलूस होगा जहाँ सत्ताधारी दल खुद ही विपक्ष के खिलाफ सड़कों पर उतर रहा है, जबकि निर्णय लेने की सारी शक्ति सरकार के पास है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि महिलाओं के आरक्षण के लिए निकाले गए इस मार्च में महिलाओं से ज्यादा पुरुषों की संख्या दिखाई दे रही है, जो अपने आप में एक विरोधाभास है।
राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य और देश में आपकी सरकार है, अधिकार आपके पास हैं, फिर विरोध किसका किया जा रहा है? उन्होंने मांग की कि 2023 में पारित कानून को बिना किसी नई शर्त (जैसे 850 सीटों की परिसीमन शर्त) के तुरंत जमीन पर उतारा जाए। राउत के इस बयान ने एक बार फिर 'खरात कनेक्शन' और महिला आरक्षण के मुद्दे को महाराष्ट्र की राजनीति में गरमा दिया है।