Chandrakant Patil On Sanjay Raut (फोटो क्रेडिट-X)
Chandrakant Patil On Sanjay Raut: महाराष्ट्र की राजनीति में आरोपों का खेल एक बार फिर गरमा गया है। इस बार शिवसेना के दोनों गुटों के बीच जुबानी जंग ने सनसनी मचा दी है। मुक्ताईनगर से विधायक चंद्रकांत पाटिल ने सांसद संजय राउत पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि भविष्य में शिवसेना (UBT) को खत्म करने के पीछे राउत का ही हाथ होगा। पाटिल का कहना है कि संजय राउत जानबूझकर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं और उनकी वजह से ही एकजुट शिवसेना में फूट पड़ी थी।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब संजय राउत ने एक बयान में कहा कि चंद्रकांत पाटिल आने वाले चुनाव में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का साथ छोड़कर बीजेपी के टिकट पर लड़ सकते हैं। इस पर पलटवार करते हुए पाटिल ने कहा कि राउत खुद ठाकरे गुट को तोड़कर एक नया गुट बनाने की फिराक में हैं। उन्होंने साफ किया कि वे एकनाथ शिंदे के साथ पूरी वफादारी से खड़े हैं और उन्हें छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पाटिल के इस दावे के बाद सियासी गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विधायक चंद्रकांत पाटिल ने कड़े शब्दों में संजय राउत की आलोचना करते हुए कहा कि राउत शिवसेना (UBT) में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका दावा है कि राउत जल्द ही उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अपना अलग रास्ता चुन सकते हैं। पाटिल ने सवाल उठाया कि आखिर राउत जलगांव में एक शादी समारोह में आकर राजनीति की बातें क्यों कर रहे हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हमें किसी को अपनी वफादारी साबित करने की जरूरत नहीं है, बल्कि जनता सब जानती है कि असली शिवसेना कौन सी है।
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इससे पहले संजय राउत ने दावा किया था कि मुक्ताईनगर और पाचोरा-परोला के विधायक अगले चुनाव में पाला बदल सकते हैं। राउत का कहना है कि ये विधायक गिरीश महाजन के बेहद करीबी हैं और उनकी ‘पुख्ता जानकारी’ के अनुसार ये लोग बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरेंगे। राउत के इस बयान ने महायुति गठबंधन के भीतर भी हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, चंद्रकांत पाटिल ने इसे पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि अगर वे कभी गद्दारी करेंगे तो सीधे घर बैठना पसंद करेंगे, लेकिन पाला नहीं बदलेंगे।
पाटिल के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब सबकी नजरें संजय राउत और मातोश्री की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है। क्या वाकई राउत कोई नया गुट बनाने की योजना बना रहे हैं या यह केवल एक राजनीतिक माइंड गेम है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, जलगांव से लेकर मुंबई तक इस बयानबाजी ने तापमान बढ़ा दिया है और आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।