

Sanjay Raut On Nitin Gadkari Ethanol Policy: केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति को लेकर मचे देशव्यापी घमासान के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मुख्य प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक विस्फोट किया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा खुद को बदनाम करने की साजिश वाले बयान का समर्थन करते हुए राउत ने दावा किया कि गडकरी के खिलाफ ये बड़ी साजिश किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि खुद भारतीय जनता पार्टी के ही शीर्ष नेताओं ने रची है।
संजय राउत ने गडकरी को साल 2014 के घटनाक्रम की याद दिलाते हुए आगाह किया कि उन्हें आगामी 2029 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद की रेस से बाहर करने के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत एक चक्रव्यूह में फंसाया जा रहा है। इसके साथ ही राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शरद पवार की हालिया मुलाकात पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए शिंदे गुट पर तीखा जुबानी हमला बोला।
इथेनॉल नीति पर सफाई देते हुए नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा था कि इस नीति से उनका कोई व्यक्तिगत आर्थिक लाभ नहीं जुड़ा है और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। इस पर मुहर लगाते हुए संजय राउत ने मीडिया से कहा, "नितिन गडकरी को पूरे देश के सामने इस मुद्दे पर एक विस्तृत प्रस्तुति देनी चाहिए, क्योंकि जनता के मन में यह भ्रम पूरी तरह साफ हो चुका है कि इस दुष्प्रचार के पीछे उनके अपने ही लोग हैं। गडकरी को बदनाम करने में कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं है।"
राउत ने आगे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "नितिन गडकरी 2029 में प्रधानमंत्री पद के सबसे योग्य और प्रबल दावेदार हैं। यही वजह है कि उनकी अपनी ही पार्टी के कुछ शक्तिशाली लोग उनकी प्रतिष्ठा और बेदाग छवि को भारी नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। साल 2014 में भी भाजपा अध्यक्ष के रूप में उनके दूसरे कार्यकाल से ठीक पहले अपनों ने ही उन्हें धोखा दिया था। गडकरी भली-भांति जानते हैं कि उनके खिलाफ यह जाल कौन बुन रहा है।"
दो दिन पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार के बीच हुई औचक मुलाकात पर ठाकरे गुट ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा था कि शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता से मिलने पर कड़वाहट या मनमुटाव रखना गलत है। शिंदे के इसी बयान पर पलटवार करते हुए संजय राउत ने उन्हें करारा जवाब दिया।
राउत ने आक्रामक अंदाज में कहा, "हां, हमारे मन में बिल्कुल कड़वाहट और मनमुटाव है और यह हमेशा रहेगा। एकनाथ शिंदे के पार्टी छोड़ने से हमें कोई शिकायत नहीं है, लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी कहीं जा सकता है। लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मदद से उन्होंने बालासाहेब ठाकरे द्वारा खून-पसीने से सींची गई मूल शिवसेना को ही लूट लिया और उसके मालिक बन बैठे। हमारी शिकायत और गुस्सा इसी बात को लेकर है, जिसे हम जैसे वफादार शिवसैनिक जीवनभर नहीं भूल सकते।"
संजय राउत ने शिवसेना के साथ-साथ एनसीपी में हुई बगावत का उदाहरण देते हुए अजित पवार गुट को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने तीखे सवाल दागते हुए पूछा कि क्या शरद पवार के जीवनकाल में अमित शाह के आशीर्वाद से बनाई गई नई पार्टी ही असली पार्टी मान ली जाएगी?
राउत ने पूछा, "आप (एकनाथ शिंदे) उस गौरवशाली पार्टी के जनक कैसे बन गए? यही बात अजित पवार गुट पर भी लागू होती है। क्या पार्थ पवार, जय पवार, सुनेत्रा ताई पवार, सुनील तटकरे या प्रफुल्ल पटेल मिलकर उस पार्टी के असली हकदार या जनक बन सकते हैं जिसे शरद पवार ने स्थापित किया था? अपनों की पीठ में छुरा घोंपकर और पार्टियां चुराकर सत्ता का सुख भोगने वाले लोग अब हमें कड़वाहट खत्म करने और मर्यादा की राजनीति सिखाने का ढोंग न करें।"