एक बार फिर बरसे गालीबाज संजय राउत: ठाकरे गुट के बागी सांसदों पर तीखा प्रहार, कैमरे पर बोले, डोंट कट
Sanjay Raut Abuses Rebel MPs: संजय राउत का फिरसे दिल्ली में फूटा गुस्सा। बागी सांसदों को सरेआम दी भद्दी गालियां, मीडिया से बोले 'डोंट कट'। महाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर से मची भारी खलबली।
- Written By: गोरक्ष पोफली
संजय राउत (सोर्स: फाइल फोटो)
Sanjay Raut Abusive Language: महाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर और शिवसेना UBT के भीतर मची भगदड़ ने एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने भाषाई मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। शिवसेना उद्धव गुट के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत अपने उग्र तेवरों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन हाल ही में दिल्ली में उनके एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। 17 जून को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने बागी सांसदों के लिए सरेआम कैमरे के सामने भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया।
डोंट कट गाली को ही बनाया अपना हथियार
मुंबई दक्षिण के सांसद अरविंद सावंत के साथ मीडिया से रूबरू होते हुए राउत ने केवल गालियां ही नहीं दीं, बल्कि मीडियाकर्मियों को साफ लहजे में हिदायत भी दे डाली। उन्होंने कहा कि उनके बयान के इस गाली-गलौज वाले हिस्से को बिल्कुल भी कट न किया जाए। राउत का तर्क था कि पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले लोग इसी भाषा और व्यवहार के लायक हैं। वायरल वीडियो में उन्हें बार-बार अपशब्दों का इस्तेमाल करते सुना जा सकता है।
बागी सांसदों को बताया डरपोक और कायर
संजय राउत ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन लोगों के खून में ही बेईमानी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कल तक जो नेता निर्वाचन क्षेत्रों में अकेले घूमते थे, अब वे सुरक्षा के घेरे में चलेंगे। राउत के अनुसार, अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उन्हें आगे-पीछे पुलिस की गाड़ियां और सीआरपीएफ के जवानों का घेरा देंगे। उन्होंने तीखा कटाक्ष किया कि ये बागी अब ऐसे घूमेंगे मानो किसी युद्ध से शौर्य पदक जीतकर लौटे हों, जबकि असल में वे केवल डरपोक हैं।
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राजनीतिक संकट और हताशा
गौरतलब है कि शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के पास लोकसभा में कुल 9 सांसद हैं, जिनमें से 6 सांसदों के बगावत करने की अटकलें हैं। ये बागी सांसद दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अपने अलग गुट को मान्यता दिलाने की जुगत में हैं। संजय राउत इस संकट को टालने और सांसदों को मातोश्री के पाले में वापस लाने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि राउत की इस अमर्यादित भाषा ने सुलह की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
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संस्कृति या मजबूरी?
संजय राउत का यह उग्र गालीबाज अवतार या तो पार्टी की मौजूदा दुर्दशा को न रोक पाने की हताशा है या फिर उनका पुराना आक्रामक अंदाज। जहां एक ओर ठाकरे गुट के समर्थक इसे ‘शेर की दहाड़’ बताकर तारीफ कर रहे हैं, वहीं विरोधी इसे महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति का पतन करार दे रहे हैं। राउत पहले ही इन अपशब्दों को महाराष्ट्र की संस्कृति बताकर अपना पक्ष साफ कर चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि उन्हें अपनी भाषा पर कोई पछतावा नहीं है। फिलहाल, इस गाली-गलौज वाले वीडियो ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा रखा है और ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच यूबीटी खेमे की बेचैनी को जगजाहिर कर दिया है।
