

Thane Borivali Twin Tunnel Project Current Status: भारी ट्रैफिक एवं प्रदूषण के घेरे में फंसी देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए ऑक्सीजन प्लांट बने संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान
के नीचे से गुजरने वाली चार सड़क सुरंगों का काम अब अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रहा है। इनमें दो सुरंगें बृहन्मुंबई मनपा (बीएमसी) की गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना का हिस्सा हैं, जबकि दूसरी दो ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल परियोजना के तहत बनाई जा रही हैं।
जीएमएलआर के चरण-3(बी) में गोरेगांव पूर्व स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी और मुलुंड पश्चिम के अमर नगर के बीच संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे दो समानांतर भूमिगत सुरंगें बनाई जा रही हैं। प्रत्येक सुरंग करीब 5.30 किलोमीटर लंबी और तीन लेन की है। दोनों सुरंगों का निर्माण टनल बोरिंग मशीन (TBM) से किया जा रहा है।
बीएमसी के मुताबिक पहली टीबीएम ‘तुलशी’ को 17 अगस्त को चालू किया गया था। 24 सितंबर तक इस मशीन ने 64 मीटर खुदाई पूरी कर ली है। इस दौरान सुरंग में 27 रिंग सेगमेंट और दो अस्थायी रिंग सेगमेंट लगाए गए हैं।
इसी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। एमएमआरडीए के अनुसार परियोजना की कुल लंबाई 11.84 किलोमीटर है, जिसमें 10.25 किलोमीटर सुरंग और 1.59 किलोमीटर कनेक्टर शामिल हैं। प्रत्येक ट्यूब में दो ट्रैफिक लेन, एक आपातकालीन लेन और पैदल मार्ग का प्रावधान है।
ठाणे साइड पर ‘नायक’ टीबीएम का SAT फरवरी 2026 में पूरा हुआ और अप्रैल में इसकी लॉन्चिंग हुई। दूसरी मशीन ‘अर्जुना’ का SAT जून में पूरा होने के बाद अगस्त 2026 में लॉन्च किया गया। एमएमआरडीए के अनुसार ठाणे साइड से सुरंग की खुदाई फिलहाल जारी है और अगस्त 2026 तक परियोजना की भौतिक प्रगति 13.73 प्रतिशत थी। बोरीवली साइड पर कास्टिंग यार्ड और लॉन्चिंग शाफ्ट क्षेत्र में शुरुआती निर्माण कार्य जारी हैं। ठाणे-बोरीवली परियोजना में दोनों टीबीएम से ठाणे दिशा में खुदाई का काम आगे बढ़ रहा है। दोनों प्रोजेक्ट का उद्देश्य पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों के बीच सीधा सड़क संपर्क उपलब्ध कराना और मौजूदा मार्गों पर यातायात दबाव कम करना है।
दूसरी टीबीएम ‘विहार’ की असेंबली 92 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। मशीन की साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट (SAT) 13 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है और तकनीकी परीक्षण सफल रहने पर 22 अक्टूबर से दूसरी सुरंग की खुदाई शुरू करने का कार्यक्रम है। उल्लेखनीय है कि दोनों टीबीएम संजय गांधी उद्यान के अंतर्गत ही बने 'तुलसी' एवं 'विहार' इन दो जलाशयों के नाम पर लॉन्च किया गया है।
परियोजना की निगरानी के लिए बीएमसी एक डैशबोर्ड भी तैयार कर रही है, जिसमें खुदाई की दैनिक प्रगति, काम पूरा होने का प्रतिशत, सुरक्षा व्यवस्था, मशीनरी, मानव संसाधन और निर्धारित पूर्णता तिथि जैसी जानकारी दर्ज होगी। जीएमएलआर परियोजना को फरवरी 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान मुंबई के मध्य स्थित एक प्रमुख प्राकृतिक क्षेत्र और संरक्षित वन है। करीब 104 वर्ग किलोमीटर में फैला यह उद्यान जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। यहां तेंदुए, हिरण, बंदर, सियार और कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। उद्यान में स्थित प्राचीन कन्हेरी गुफाएं इसका प्रमुख ऐतिहासिक आकर्षण हैं।
घने जंगल, पहाड़ियां, झीलें और हरित क्षेत्र मुंबई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में महत्वपूर्ण पर्यावरणीय भूमिका निभाते हैं। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान मुंबई,ठाणे और आसपास के क्षेत्र के लिए प्राकृतिक ऑक्सीजन क्षेत्र, जैव विविधता संरक्षण स्थल और पर्यटन केंद्र के रूप में भी महत्वपूर्ण है।