फर्जी एनकाउंटर के आरोप साबित नहीं, मुंबई कोर्ट ने पुलिसकर्मियों समेत सभी आरोपियों को किया बरी
Fake Encounter Case India Update: संदीप गाडौली एनकाउंटर केस में मुंबई की सेशन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी 8 आरोपियों को बरी कर दिया। इस मामले में हरियाणा पुलिस के पांच पुलिसकर्मी भी आरोपी थे।
- Written By: अपूर्वा नायक
संदीप गाडौली (सौ. सोशल मीडिया )
Sandeep Gadoli Encounter Case: गुरुग्राम के गैंगस्टर संदीप गाडौली के कथित फर्जी एनकाउंटर में फंसे सभी 8 आरोपियों को बड़ी राहत मिल गई है।
मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को इन सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया। इस एनकाउंटर मामले में हरियाणा पुलिस के पांच पुलिसकर्मियों को भी आरोपी बनाया गया था।
बरी किए गए लोगों में एनकाउंटर टीम के इंचार्ज प्रद्युम्न यादव, विक्रम सिंह, जितेंद्र यादव, दीपक काकरान, परमजीत अहलावत और सोनिया पाहुजा और वीरेंद्र गुर्जर के नाम शामिल हैं। जबकि गाडौली की गर्लफ्रेंड और मॉडल दिव्या पाहुजा की हत्या जनवरी 2024 में गुरुग्राम के एक होटल में की गई थी।
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आखिर क्या है पूरा मामला?
गैंगस्टर संदीप गाडौली का साल 2015 16 के दौरान हरियाणा में काफी दबदबा हुआ करता था। जब उसके अपराधों की लिस्ट बड़ी हो गई, तो पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए वह राजस्थान व मुंबई से ऑपरेट करने लगा, 7 फरवरी, 2016 को गाडौली अपनी कथित गर्लफ्रेंड व मॉडल दिव्या पाहुजा के साथ मुंबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित एक होटल में पहुंचा।
उसे इस बात की भनक नहीं थी कि उसका पीछा करते हुए गुरुग्राम पुलिस की टीम भी उसी होटल में पहुंच गई। पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में गाडौली का एनकाउंटर कर दिया गया। पुलिस ने इस एनकाउंटर को असली करार देते हुए बताया कि गाडौली पर कई हत्याओं समेत 40 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे।
परिवार वालों ने बताया फर्जी एनकाउंटर
- गाडौली के परिवार वालों ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए आरोप लगाया कि यह मुठभेड़ पुलिस अधिकारियों और प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टर बिदर गुर्जर के भाई मनोज की मिलीभगत से प्लान की गई थी।
- परिजनों ने गाडौली का शव लेने से इनकार करते हुए न्याय के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। जिसके बाद मुंबई पुलिस को विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया गया।
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लेकिन इस जांच में किसी भी आरोपी पुलिस वाले के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले। सेशन कोर्ट ने हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों को साबित करने के लिए निर्णायक सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए सभी आरोपी पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया।
